23 February, 2018

कहानी- किटी पार्टी | ब्लॉग आपकी सहेली


''दिपा, तुमने शिल्पा से बात की क्या? वो अपनी किटी ज्वाइन कर रहीं हैं न?'' प्रिती ने पूछा। दिपा ने कहा- ''हां, मैंने बात तो की थी। लेकिन शिल्पा ने मना कर दिया। अंजली ने पूछा- 'क्यों? दिपा ने बताया कि,"उसकी इच्छा तो बहुत होती हैं हम सबके साथ इंज्वाय करने की...लेकिन उसके पास वक्त नहीं हैं।'
प्रिती, दिपा, अंजली मध्यमवर्गिय परिवार की हमउम्र महिलाएं हैं। इनकी किटी में पंद्रह महिलाएं शामिल हैं। महीने में एक बार बारी-बारी से कभी किसी के यहां तो कभी किसी के यहां जमा होती हैं। मौज-मस्ती, मेल-मिलाप, दो-चार गेम्स खेलना और नाश्ता-पानी का दौर चलता हैं। महीने में एक बार ही सही, पर हम उम्र सहेलियों के साथ थोड़ी सी गपशप हो जाती हैं और इधर-उधर के सभी के हाल-चाल पता चल जाते हैं। कूल मिला कर माइंड फ्रेश हो जाता हैं। इन लोगों की इच्छा थी कि शिल्पा जो 4-5 महिने पहले दिपा के अपार्टमेंट में रहने आई थी, इनकी किटी ज्वाइन कर ले क्योंकि शिल्पा खानदानी रईस थी। उस के पति बैंक मैनेजर थे। बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ रहे थे और शिल्पा भी पढ़ी-लिखी सलीकेदार महिला थी। ये लोग अपनी किटी में ऐसी ही महिलाओं को जॉइन करवाती थी जिसमें ऐसी खुबियां हो। ताकि उन्हें एक अच्छी सहेली मिले।
लेकिन जैसे ही दिपा ने बताया कि शिल्पा ने किटी जॉइन करने से मना किया हैं तो सभी के तेवर बदल गए। उन्हें ये अपना अपमान सा प्रतीत हुआ क्योंकि शिल्पा ने कहा था कि उसके पास वक्त नहीं हैं। प्रिती ने कहा- 'सब बहाने हैं! ऐसे कौन से काम में व्यस्त रहती हैं मैडम? बर्तन, कपडा और झाडू-पोंछा करने के लिए तो कामवाली बाई हैं ही। सिर्फ़ खाना ही तो बनाना होता हैं। हम सभी के घर में जैसे कोई काम ही नहीं रहता इसलिए किटी जॉइन करते हैं!''

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ज्योति देहलीवाल जी एक गृहणी है और महाराष्ट्र में निवारसरत है। आप 2014 से ब्लॉग लिख रही है। उनके ब्लॉग पर विभिन्न विषयों से संबधित रोचक जानकारियां और सामाजिक व घरेलू टिप्स आदि ढ़ेरो जानकारीवर्द्धक लेखो की काफी लम्बी श्रृखला है। ज्योति जी से ई-मेल jyotidehliwal708@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है और उन्हे Facebook पर फालो कर सकते है।


यदि आप भी अपनी ब्लॉग पोस्ट को अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचाना चाहते है। तो अपने ब्लॉग की नई पोस्ट की जानकारी या सूचना हमें दें। अपनी ब्लॉग की पोस्ट शेयर करने के लिए अपने ब्लॉग पोस्ट का यूआरएल और अपने बारे में संक्षिप्त जानकारी एवं फोटो सहित हमें - iblogger.in@gmail.com पर ई-मेल करें।

परिवर्तन शाश्वत है | ब्लॉग ऊंचाईयाँ


परिवर्तन प्रकृति का नियम है।
परिवर्तन ना होने पर जड़ता का
अनुभव होने लगता है ।
जड़ता में सुन्दरता का क्षय होना स्वाभाविक है ।

मौसम में परिवर्तन इसका शाश्वत उदहारण है ।
मौसम में परिवर्तन होता है तो, प्रकृति खिलती है
फ़सल लहलहाती है ।

 फलतःपरिवर्तन शुभ का संकेत है
 वस्तुतः परिवर्तन सही दिशा में हो ।

 परिवर्तन में नवीनता भी निश्चित है
 नवीनता का स्वागत करें, मर्गदर्शन करें

आवयश्क नहीं जो कठिन है, जटिल है वही
सही है।

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श्रीमती रितु आसूजा जी सन 2013 से ब्लॉग लिख रहीं है और तब से लेकर अब तक प्रेरक और समाजिक लेखन के जरिए ब्लॉग जगत में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। उनसे ई-मेल ritu.asooja1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। 


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20 February, 2018

अब नहीं चुभते तेरे शब्दों के तीर | ब्लॉग मन से


अब नहीं चुभते तेरे शब्दों के तीर... 
जो दिल को चीरकर लहूलुहान कर दे
धज्जियाँ उड़ा दे इज्जत की
स्वाभिमान बेजान कर दे
दफ़न होती सिसकियों का
जीना हराम कर दे
अब नहीं चुभते तेरे शब्दों के तीर.... 
जो वजूद मिटाते थे
मुझे मुझसे ही छीनकर
मेरी नजरों में गिराते थे
घूरते थे मुझको
मेरी औकात दिखाते थे
मेरी लाचारी मेरी बेबसी का
तमाशा बनाते थे
अब नहीं चुभते तेरे शब्दों के तीर... 
जो गिनते थे मेरी रोटी के टुकड़े
मेरे कपड़ों के एहसान और
खिदमत में गुजारी ज़िंदगी के बदले में

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए 'मन से' ब्लॉग पर जाएं >>>



नीतू ठाकुर जी ने अक्टूबर 2017 में ब्लॉग लेखन शुरू किया है। अब तक आप अन्य समूह ब्लॉगों, चर्चा मंचों एवं वेब पत्रिकाओं में निरंतर सक्रिय रहती है।  


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जब डालती है ख्वाबों में खलल.. | ब्लॉग गूफ्तगू


वाकिफ तो होेगें इस बात से..
इन पलकों पे कई सपने पलते हैं
उफ़क के दरीचों से झाँकती शुआएं
डालती है ख्वाबों में खलल..
जो अस्बाब है
गुजिश्ता लम्हों की, 
पर ये सरगोशियाँ कैसी?
असर है 
जो  एक लम्हें के लिए..
शबनमी याद फिर से मुस्कराता है
पन्ने है जिंदगी के..जिनसे

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए 'गुफ़्तगू' ब्लॉग पर जाएं >>>



पम्मी सिंह जी 2015 से ब्लॉग लेखन कर रहीं है। इसके अलावा आप अन्य समूह ब्लॉगों, चर्चा मंचों एवं वेब पत्रिकाओं में निरंतर सक्रिय रहती है और अापका एक कविता संग्रह भी प्रकाशित हो चुका है।


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16 February, 2018

मैं तुम्हें भुलाना चाहूँगा तुम चाहे मुझे भुलाओ ना | ब्लॉग मेरी आवाज


कल साँझ हमारे साथ रही अब छोड़ मुझे इतराओ ना
मैं तुम्हें भुलाना चाहूँगा तुम चाहे मुझे भुलाओ ना ।।

तेरी धड़कन से तेरी यादों से तेरे सपनों से तेरे ख्वाबों से
मुझे दूर तुम्हें कर देना है अपनी सारी मुलाकातों से
गर तुम्हें दूर ही जाना था इक बार बता के जाती तो
तुम कह देती दिल की बातें पर एक बार तुम आती तो

कुछ ख्वाब टूट कर बिखर गये अब सपने मुझे दिखाओ ना

हर बार तुम्हारे रूठने पर हर बार मनाया करता था
हर बार तुम्हें अपनाने को तेरे पास मैं आया करता था
इस बार हुआ है क्या ऐसा क्यों फेर लिए मुँह तुम हमसे
मैं खुशियों में जीने वाला क्यों जोड़ दिया रिस्ता गम से

अब कैसे मैं जी पाऊँगा थोड़ा सा तुम्हीं बताओ ना




नीलेन्द्र शुक्ल 'नील' जून 2016 से ब्लॉग दुनिया में आए है। ये काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से संस्कृत में स्नातक के छात्र है। आपसे sahityascholar1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।


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खलल.... | ब्लॉग अभिव्यक्ति


जी हाँ, पडती है खलल 
जीवन में मेरे जब
आकर कोई कर जाता 
है सपनों को ध्वस्त मेरे 
देता है झकझोर मेरे 
समूचे अस्तित्व को,
कितनी आसानी से 
कह जाता है,
ये करो, वो मत करो 
शायद उनकी 
नजरों में




शुभा मेहता सितम्बर 2013 से ब्लॉगिंग कर रही है और बचपन से ही पढ़ने की शौकीन है। उनके प्रोफाइल के अनुसार शुभा जी कहती है कि मैं अपने जीवन की छोटी छोटी अनुभूतियों को कविताओं और लेखों में पिरोने की कोशिश करती हूँ।


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13 February, 2018

चिरयौवन प्रेम | ब्लॉग मन के पाखी


तुम्हारे गुस्से भरे
बनते-बिगड़ते चेहरे की ओर 
देख पाने का साहस नहीं कर पाती हूँ
भोर के शांत,निखरी सूरज सी तुम्हारी आँखों में
बैशाख की दुपहरी का ताव
देख पाना मेरे बस का नहीं न
हमेशा की तरह चुपचाप 
सिर झुकाये,
गीली पलकों का बोझ लिये 
मैं सहमकर तुम्हारे सामने से हट जाती हूँ
और तुम, ज़ोर से 
दरवाज़ा पटक कर चले जाते हो
कमरे में फैली शब्दों की नुकीली किर्चियों को
बिखरा छोड़कर 
‎बैठ जाती हूँ खोलकर कमरे की खिड़की 
हवा के साथ बहा देना चाहती हूँ
कमरे की बोझिलता 
नाखून से अपने हरे कुरते में किनारों में कढ़े
लाल गुलाब से निकले धागों को तोड़ती
तुम्हारी आवाज़ के
आरोह-अवरोह को महसूस करती हूँ

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए 'मन के पाखी' ब्लॉग पर जाएं >>>



श्रीमती श्वेता सिन्हा जी ने सन 2017 से ही ब्लॉग लिखना शुरू किया है और तब से लेकर अब तक 150 से ऊपर रचनाएं लिख चुकीं है। उन्होने इतने कम समय में भी ब्लॉग दुनिया में अपनी व अपने ब्लॉग की बेहतर पहचसन बना ली है। वैसे इस पहचान के लिए उनके लेखन को ही इसका श्रेय दिया जा सकता है। उनसे ई-मेल swetajsr2014@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। 


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जीवन जैसी ही नदिया निरन्तर बहती जाती | ब्लॉग नई सोच


पहाड़ों से उद्गम, बचपन सा अल्हड़पन,
चपल, चंचल वेगवती,झरने प्रपात बनाती
अलवेली सी नदिया, इठलाती बलखाती
राह के मुश्किल रौड़ो से,कभी नहीं घबराती
काट पर्वत शिखरों को,अपनी राह बनाती
इठलाती सी बालपन में,सस्वर आगे बढ़ती
जीवन जैसी ही नदिया, निरन्तर बहती जाती....

अठखेलियां खेलते, उछलते-कूदते
पर्वतों से उतरकर,मैदानों तक पहुँचती
बचपन भी छोड़ आती पहाड़ों पर ही
यौवनावस्था में जिम्मदारियाँँ निभाती
कर्मठ बन मैदानों की उर्वरा शक्ति बढ़ाती
कहीं नहरों में बँटकर,सिंचित करती धरा को
कहीं अन्य नदियों से मिल सुन्दर संगम बनाती
अब व्यस्त हो गयी नदिया रिश्ते अनेक निभाती
जीवन जैसी ही नदिया, निरन्तर बहती जाती...


<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ब्लॉग 'नई सोच' पर जाएं >>>


सुधा देवरानी जी 2016 से ब्लॉगिग कर रहें है और अपनी कविताओं को नई सोच ब्लॉग के माध्यम से पाठको के बीच रख रहीं है। ब्लॉगर सुधा जी से ई-मेल sdevrani16@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है। 


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मोहब्बत किसी भी मनुष्य का मूल स्वभाव है | ब्लॉग ऊंचाईयाँ


"मैं मोहब्बत हूँ
किसी भी मनुष्य का मूल स्वभाव हूँ "

मैं मोहब्बत जीती हूँ 😍
एहसासों में ,जज़्बातों में

मोहब्बत का कोई मजहब नहीं
मोहब्बत तो हर दिल की भाषा है ❤️
शब्द नहीं ,अर्थ नहीं ,
निस्वार्थ समर्पण है
दुआओं में ,दर्द में
क्रन्दन में ,क्रोध में
उम्र का बन्धन नहीं
रिश्तों की मोहताज नहीं
उपहार नहीं ,व्यापार नहीं
भावों में जज़्बातों में
मैं मोहब्बत हूँ ,मैं किसी भी
मनुष्य का मूल स्वभाव हूँ
मोहब्बत से ही सींचित

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श्रीमती रितु आसूजा जी सन 2013 से ब्लॉग लिख रहीं है और तब से लेकर अब तक प्रेरक और समाजिक लेखन के जरिए ब्लॉग जगत में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। उनसे ई-मेल ritu.asooja1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। 


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10 February, 2018

बलात्कार को रोकने 19 साल की सीनू ने बनाई - रेप प्रूफ पैंटी | ब्लॉग आपकी सहेली


दोस्तों, जैसा कि आपकी सहेली की हमेशा कोशिश रहती हैं कि देश के असली हीरो से आप लोगों को मिलवाऊं। इसी कोशिश के अंतर्गत आज मीलिए, 19 साल की सीनू से जिन्होंने महिलाओं और लड़कियों को समाज की हैवानियत और बलात्कार से बचाने के लिए 'रेप प्रूफ पैंटी' बनाई हैं! उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद की रहने वाली 19 वर्षीय सीनू कुमारी ने एक ऐसी पैंटी का आविष्कार किया है, जो महिलाओं को रेप से बचाएगी। साधारण किसान परिवार की यह लड़की बीएससी थर्ड ईयर की स्टूडेंट है। हम बलात्कारियों को भला-बुरा कह कर चूप बैठ जाते हैं। कुछ लोग पीड़िता को ही दोष देने लगते हैं कि उसने बहुत छोटे कपड़े पहने होंगे या रात को अकेली घर से बाहर क्यों निकली आदी। लेकिन इस नन्हीं सी बच्ची ने इसका उपाय ढूंढने की कोशिश की।

इसलिए बनाई ये रेप प्रूफ पैंटी

हर रोज होनेवाली रेप की घटनाओं से सीनू बुरी तरह आहत थी। वो हमेशा सोचती रहती कि इन रेप की घटनाओं को रोकने के लिए मैं क्या करूँ? एक सात साल की बच्ची से दुष्कर्म और उसके बाद उस बच्ची की हत्या ने तो सीनू को झकझोर कर रख दिया। तब उसने मन ही मन निश्चय किया कि अब तो मुझे रेप की घटनाओं को रोकने के लिए कुछ न कुछ तो करना हैं!

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ज्योति देहलीवाल जी एक गृहणी है और महाराष्ट्र में निवारसरत है। आप 2014 से ब्लॉग लिख रही है। उनके ब्लॉग पर विभिन्न विषयों से संबधित रोचक जानकारियां और सामाजिक व घरेलू टिप्स आदि ढ़ेरो जानकारीवर्द्धक लेखो की काफी लम्बी श्रृखला है। ज्योति जी से ई-मेल jyotidehliwal708@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है और उन्हे Facebook पर फालो कर सकते है।


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09 February, 2018

सुर्ख रंग बदलते नहीं.. | ब्लॉग गुफ्तगू



जब..

छट जाएगी हर धुंध

आसमान की नीली क़बा पे

दिखेगें इन्द्रधनुषी रंग

बसारत कई खुश रंग की,

बसीरत की रंगों से

कहीं धूप, कहीं छांव है,

भागती जिंदगी की दोड़ में

क़ुर्बतों में भी सुर्ख रंग बदलते नहीं

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पम्मी सिंह जी 2015 से ब्लॉग लेखन कर रहीं है। इसके अलावा आप अन्य समूह ब्लॉगों, चर्चा मंचों एवं वेब पत्रिकाओं में निरंतर सक्रिय रहती है और अापका एक कविता संग्रह भी प्रकाशित हो चुका है।


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07 February, 2018

अपने ब्लॉग को एडसेंस पर ब्लैक लिस्ट होने से बचायें


आज iBlogger पर एक महाशय का कमेंट आया कि अपने ब्लॉग का ट्रैफिक व इनकम बढ़ाने के लिए हमारे ब्लॉग को ज्वाइन करें। शायद ऐसा ही कमेंट आपके ब्लॉग पर भी आया होगा। यदि आया है तो आप सावधान हो जाये। वजह जानने के लिए पढ़े।
हमारी टीम ने उक्त ब्लॉग का अध्ययन किया तो हमने पाया कि इस ब्लॉग के प्रत्येक सदस्य रोज आपके ब्लॉग पर एड को 10 क्लिक देंगे। इसके अलावा दस क्लिक इसके एडमिन साहब की ओर से होंगे। इन महाशय का उद्देश्य कोई बुरा नहीं है लेकिन ये जानकारी आपको जरूर होनी चाहिए, यदि आपके पास गुगल एडसेंस है।
गुगल आपके ब्लॉग के ट्रैफिक की निगरानी करता है कि वह वास्तविक है या फर्जी। यानि फर्जी क्लिक करा रहे है या वास्तविक पाठक आ रहे है।
दूसरी ओर गुगल आपके ब्लॉग पर चल रहे विज्ञापनों पर क्लिक की भी निगरानी करता है। जैसे कि इन महोदय का कहना था कि आपके ब्लॉग पर गुगल पर सर्च करके आपके ब्लॉग के विज्ञापनों को क्लिक किया जायेगा। लेकिन शायद यह भूल गये है कि गुगल के पास अत्याधुनिक तकनीक है जो आईपी एड्रेस के साथ ही अन्य विशेष तकनीकों से आपके फर्जी क्लिक की निगरानी करके उसे पकड़ लेता है।
गुगल को पता होता है कि वास्तविक क्लिक कितने आ रहे है और कितने फर्जी आ रहे है। 
आपको बता दें कि एक बार गुगल एडसेंस से ब्लैक लिस्टेड होने पर पुन: जुड़ना मुश्किल हो जाता है। गुगल एडसेंस आपको सबसे ज्यादा इनकम का मौका प्रदान करता है। वहीं एडसेंस से ब्लैक लिस्टेड होने पर आपको अन्य नेटवर्क पर भी समस्या आ सकती है, क्योंकि अन्य नेटवर्क भी एडसेंस द्वारा प्रमाणित ब्लॉगों को अधिक महत्व देते है।
इसलिए हमारी सलाह है कि आप लोग अब तक जैसे ब्लॉगिंग करते आ रहे है वैसे ही ब्लॉगिंग करते रहे और वास्तविक पाठकों के बीच रहे।

अपने ब्लॉग का ट्रैफिक बढ़ाने के लिए हर्षवर्धन जी कुछ टिप्स अपने ब्लाॅग टेक मी हिन्दी में दे रहे है। यहां पर क्लिक करके आप पढ़ सकते है।


हैप्पी ब्लॉगिंग

टीम iBlogger

प्रेम न हाट बिकाय... | ब्लॉग बदलाव


आज पूरी दुनिया में वेलेंटाइन डे का नशा सा छा गया है ये मार्केटिंग का ही जलवा है की बच्चे बूढ़े हर किसी की जुबान पर इसका नाम चढ़ गया है. हर साल सात से चौदह फरवरी तक प्यार के सप्ताह के रूप में मनाया जाने लगा है जिसे आज की पीढ़ी मस्ती का एक मौका समझ बैठे हैं. रोज डे,प्रोपोज डे,प्रोमिस डे, किस डे, हग डे, चोकलेट डे, टेडी डे और वेलेंटाइन डे. यानि की हर दिन का मार्केटिंग फंडा. ये पाश्चात्य संस्कृति की ही देन है जो हमारी संस्कृति और समाज को विकृत करती जा रही है. इसमें कार्ड, गिफ्ट्स कंपनियो के साथ मीडिया की भी बड़ी भूमिका रही है. वेलेंटाइन को मौज मस्ती का दिन समझने वालो को प्रेम की समझ भी नही होती. गिफ्ट देकर आई लव यू कह समझते हैं की इश्क कर लिया. अरे प्रेम कोई बताने की चीज है क्या ये तो बस एहसास है जिसे दिल खुद पढ़ लेता हैं. वेलेंटाइन को बाजार ने एक मौका के रूप में भुनाने का काम किया है. बड़े बड़े आयोजन होने लगे हैं जहाँ धूम धड़ाके और मौज मस्ती, अश्लीलता की हदों को पार करता भोंडा नृत्य के अलावा कुछ नही होता. शराब-शबाब और कबाब के बीच मनने लगा है प्रेमोत्सव का पर्व. 14 फरवरी के दिन को लोग प्यार के इजहार का दिन मानते हैं लोग जो की सेंट वेलेंटाइन का जन्मदिवस है. क्या इजहार-ए-इश्क किसी खास दिन का मोहताज है? यह तो ऐसी चीज है जो न कही जाती है और न सुनी जाती है सिर्फ और सिर्फ दिल से महसूस करने का नाम है इश्क. आज लोगो ने प्रेम का स्वरुप ही बदल दिया है.

<<< पूरा लेख पढ़ने के लिए 'बदलाव' ब्लॉग पर जाएं >>>



विगत 20 वर्षों से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े पंकज भूषण शर्मा जी 2009 से ब्लॉग जगत से जुड़े हुए है। प्रारम्भिक स्कूली शिक्षा के समय से ही कविता, गज़ल, नाटक कहानी, लेख और निबन्ध लिखते रहे हैं। अब तक विभिन्न विधाओं में सैकड़ों रचनाये देशभर की पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है। सम्प्रति झारखण्ड सरकार में संचार सलाहकार के रूप में कार्यरत और विभागीय पत्रिका "स्वच्छता प्रहरी" का संपादन कर रहे है। इसके अलावा अन्य कई पत्र पत्रिकाओं का संपादन भी कर रहे है। डॉक्यूमेंट्री और लघु फ़िल्मों का निर्माण और स्थानीय फीचर फिल्मों के लिए भी लेखन और जनसम्पर्क कार्यरत। आकाशवाणी रांची के संपादकीय व उद्घोषक पैनल में शामिल। दूरदर्शन और रेडियो माध्यम पर शोध कार्य। काव्य पाठ और मंच संचालन में भी सक्रिय भागीदारी। 11 वें अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन 2003 में "साहित्य सेवी सम्मान" से अलंकृत। स्वच्छता एवं शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक सेवा।


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नदी | ब्लॉग अभिव्यक्ति


मैं हूँ नदी...
निकल कर पहाड़ों की गोद से,
आ पहुँचती धरा पर 
सबका जीवन 
निर्मल करने 
रवि किरणें जब 
मुझको छूती 
मैं चमक उठती रजत सी 
इठलाती, बलखाती
चंचल, चपल 
जीवन देनारी।
पर हे मानव...
तू क्यों है 
इतना स्वार्थ मगन



शुभा मेहता सितम्बर 2013 से ब्लॉगिंग कर रही है और बचपन से ही पढ़ने की शौकीन है। उनके प्रोफाइल के अनुसार शुभा जी कहती है कि मैं अपने जीवन की छोटी छोटी अनुभूतियों को कविताओं और लेखों में पिरोने की कोशिश करती हूँ।


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01 February, 2018

परवरिश- ऐसे दे बच्चों को सच बोलने की प्रेरणा | ब्लॉग आपकी सहेली


चाहे कैसी भी परिस्थितियां हो सच अपने आप में एक ऐसा अस्त्र हैं जो इंसान को बड़ी से बड़ी मुसीबत से लड़ने की ताकत देता हैं। अत: ऐसे दे बच्चों को सच बोलने की प्रेरणा। माता-पिता बचपन से ही बच्चों को सच बोलना सिखाते हैं। परवरिश का एक बड़ा हिस्सा हैं कि चाहे कितनी भी बड़ी ग़लती हो जाए लेकिन हमेशा सच बोले। लेकिन इसके बावजूद बच्चे अपनी ग़लती छुपाने के लिए झूठ का सहारा लेते हैं। अपने नन्हें में सच बोलने की आदत का विकास कैसे करें, इसके लिए कुछ तरीके आपको ख़ुद आजमाने होंगे। जिन्हें बच्चे सीख सकेंगे।

खुलकर बात करें-

मैं नहीं चाहती कि मेरी नाराजगी या डांट के डर से मेरे बच्चे मुझसे झुठ बोले और किसी मुसीबत में फंस जाएं। कभी बच्चों से जाने-अनजाने कोई गलती हो जाती हैं, तो कभी बच्चों के अपेक्षा अनुसार मार्क्स नहीं आते, तो कभी बच्चे किसी और की साजिश का शिकार हो जाते हैं- इन सभी परिस्थितियों में बच्चों को लगता हैं कि यदि हमने घर में सच बतलाया तो मम्मी-पापा मारेंगे, डाटेंगे या नाराज होंगे। बचपन में मम्मी-पापा की नाराजगी से बचने के लिए बच्चे छोटे-छोटे झूठ बोलना शुरु करते हैं। धीरे-धीरे वे सच न बोलने के इतने आदी हो जाते हैं कि उन्हें ख़ुद ही पता नहीं होता कि एक दिन में वे कितनी बार झूठ बोलते हैं! इसी सच न बोलने की आदत के चलते बच्चों और माता-पिता के बीच एक तरह की संवादहीनता आ जाती हैं। और आगे चल कर इस का परिणाम इतना भयानक होता हैं कि छोटी-छोटी समस्या भी वे माता-पिता से शेयर नहीं कर पाते और अकेलेपन से जुझते हुए आत्महत्या तक कर बैठते हैं!! ग़लती होने पर उन्हें डरा कर नहीं बल्कि प्यार से पूछें। इससे वे आपसे बात करने में हिचकिचाएंगे नहीं।

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