23 April, 2018

मैं नारी खोज रही | ब्लॉग गुफ्तगू


मैं नारी
खोज रही अस्तित्व को
हर उम्र , हर पड़ाव को लांघते
बाहर के अंधेरे से बचते
तो गुम होती
भीतर के स्याह घेरे में
ये कौन सा आसेब ?
जो टिका है, नाभि के नीचे
जो जकड़ लेता है मेरे वजूद को
सहमता हर रोज सन्नाटा में
बना क्यूँ है कमजोर सृजन अंग
आबरू की डोर, ममत्व के संग

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पम्मी सिंह जी 2015 से ब्लॉग लेखन कर रहीं है। इसके अलावा आप अन्य समूह ब्लॉगों, चर्चा मंचों एवं वेब पत्रिकाओं में निरंतर सक्रिय रहती है और अापका एक कविता संग्रह भी प्रकाशित हो चुका है।


यदि आप भी अपनी ब्लॉग पोस्ट को अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचाना चाहते है। तो अपने ब्लॉग की नई पोस्ट की जानकारी या सूचना हमें दें। अपनी ब्लॉग की पोस्ट शेयर करने के लिए अपने ब्लॉग पोस्ट का यूआरएल और अपने बारे में संक्षिप्त जानकारी एवं फोटो सहित हमें - iblogger.in@gmail.com पर ई-मेल करें।

22 April, 2018

कोरा काग़ज़ है, या हसीन ख़्वाब है ज़िन्दगी | ब्लॉग ऊंचाईयाँ


“यूँ तो कोरा काग़ज़ है ज़िन्दगी
ये भी सच है ,कि कर्मों का
हिसाब - किताब है ज़िन्दगी“

“कोरा काग़ज़ है या हसीन ख़्वाब है
ज़िन्दगी
दूर से देखा तो आफ़ताब है ज़िन्दगी
कहीं समतल कहीं गहरी खाई
तो कहीं पहाड़ सी है, ज़िन्दगी“

“पृष्ठ भूमि भी हमारे ही
द्वारा सृजित है।
कर्मों पर ध्यान दे रे बन्दे
जो आज तू करता है
वही तेरा कल बनता है“

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श्रीमती रितु आसूजा जी सन 2013 से ब्लॉग लिख रहीं है और तब से लेकर अब तक प्रेरक और समाजिक लेखन के जरिए ब्लॉग जगत में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। उनसे ई-मेल ritu.asooja1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। 


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हौले से कदम बढ़ाए जा | ब्लॉग नई सोच


अस्मत से खेलती दुनिया में
चुप छुप अस्तित्व बनाये जा
आ मेरी लाडो छुपके मेरे पीछे
हौले से कदम बढ़ाये जा.....

छोड़ दे अपनी ओढ़नी चुनरी,
लाज शरम को ताक लगा
बेटोंं सा वसन पहनाऊँ तुझको
कोणों को अपने छुपाये जा
आ मेरी लाडो छुपके मेरे पीछे 
हौले से कदम बढ़ाए जा....

छोड़ दे बिंंदिया चूड़ी कंगना
अखाड़ा बनाऊँ अब घर का अँगना
कोमल नाजुक हाथों में अब


<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ब्लॉग 'नई सोच' पर जाएं >>>


सुधा देवरानी जी 2016 से ब्लॉगिग कर रहें है और अपनी कविताओं को नई सोच ब्लॉग के माध्यम से पाठको के बीच रख रहीं है। ब्लॉगर सुधा जी से ई-मेल sdevrani16@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है। 


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माँ धरा | ब्लॉग अभिव्यक्ति


हे माँ धरा
कहाँ से लाती हो
इतना धैर्य
कैसे सह लेती हो
इतना जुल्म
इतना बोझ
इतना कूड़ा -कचरा
करते हैं हम मानव
अपनी माँ को
कितना गन्दा
फिर भी बदले में
देती हो तुम
मीठे फल, अनाज
हरे भरे वृक्ष
उनकी छाँव 
समेटे रहती हो




शुभा मेहता सितम्बर 2013 से ब्लॉगिंग कर रही है और बचपन से ही पढ़ने की शौकीन है। उनके प्रोफाइल के अनुसार शुभा जी कहती है कि मैं अपने जीवन की छोटी छोटी अनुभूतियों को कविताओं और लेखों में पिरोने की कोशिश करती हूँ।



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20 April, 2018

हमें जहाँ की कहाँ पड़ी है | ब्लॉग मन से


मरती है तो मर जाने दो 
हमें जहाँ की कहाँ पड़ी है 
पागल है लड़की की माँ 
जो न्याय की खातिर जिद पे अड़ी है 
शोक प्रदर्शन खत्म हो चुका 
अब घरवालों को सहने दो 
प्रेम नगर के वासी हैं हम 
प्रेम नगर में रहने दो 
बहन, बेटियाँ बाजारों में 
बिकती हैं तो बिकने दो
सुंदर और सजीले तन पर
नजर हमारी टिकने दो 
हमको क्या लेना-देना है 
सरहद के गलियारों से 
शोहरत बहुत कमा बैठे हम
कविता के  व्यापारों से 
कोई नही होता अब घायल
शब्दों के हथियारों से 
हमको क्या लेना-देना है

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए 'मन से' ब्लॉग पर जाएं >>>



नीतू ठाकुर जी ने अक्टूबर 2017 में ब्लॉग लेखन शुरू किया है। अब तक आप अन्य समूह ब्लॉगों, चर्चा मंचों एवं वेब पत्रिकाओं में निरंतर सक्रिय रहती है।  


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चलो तुमको उड़ाता हूँ सलोने आसमाँ पे मैं | ब्लॉग मेरी आवाज़


चलो तुमको उड़ाता हूँ सलोने आसमाँ पे मैं
तुम्हारे साथ हूँ हरदम ऐ हमदम! इस जहाँ में मैं

मुझे तुम यूँ भुलाकर तो नही जी पाओगे
जहाँ तेरी नज़र जाएँगी आऊँगा वहाँ पे मैं 

तुम्हारी सादगी पर है निछावर ज़िन्दगी मेरी
मुझे अपना बनाओ तुम महक जाऊँ फिज़ा में मैं

मेरा घर-द्वार कुछ न है, तुम्हारा प्यार है सबकुछ
लिपट कर आ मिलो हमसे कहो आऊँ कहाँ पे मैं




नीलेन्द्र शुक्ल 'नील' जून 2016 से ब्लॉग दुनिया में आए है। ये काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से संस्कृत में स्नातक के छात्र है। आपसे sahityascholar1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।


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17 April, 2018

मोहब्बत खुदा है | ब्लॉग ऊंचाईयाँ


“मोहब्बतों की डोर से बँधे हैं
हम सब
मोहब्बत ना होती तो हम बिखर
 जाते तितर-बितर हो जाते “

“चाहतों की भी एक फ़ितरत है
चाहता भी उसे है ,जो नसीब में
नहीं होता”

कहते हैं की मोहब्बत में इंसान खुदा हो जाता है
    खुदा हो जाता है शायद इसीलिए सबसे
जुदा हो जाता है ।

“ना जाने क्यों लोग मोहब्बत को बदनाम
किया करते हैं ,मोहब्बत तो दिलों में पनपा करती है
मोहब्बत के नाम पर क्यों ?
क़त्ल ए आम किया करते हैं “

“मोहब्बत तो रूह से रूह का मिलन है
मिट्टी का तन सहता सितम है “

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श्रीमती रितु आसूजा जी सन 2013 से ब्लॉग लिख रहीं है और तब से लेकर अब तक प्रेरक और समाजिक लेखन के जरिए ब्लॉग जगत में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। उनसे ई-मेल ritu.asooja1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। 


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डर... | ब्लॉग अभिव्यक्ति


डर, ये तो इक हिस्सा है 
जिंदगी का...
कुछ खोने का.
कुछ न, पाने का
एक अहसास है 
जो सभी को होता है 
बहुत नोर्मल चीज है 
जिंदगी की 
डर, नकारात्मकता नही




शुभा मेहता सितम्बर 2013 से ब्लॉगिंग कर रही है और बचपन से ही पढ़ने की शौकीन है। उनके प्रोफाइल के अनुसार शुभा जी कहती है कि मैं अपने जीवन की छोटी छोटी अनुभूतियों को कविताओं और लेखों में पिरोने की कोशिश करती हूँ।


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11 April, 2018

घर | ब्लॉग अभिव्यक्ति


मेरा घर, प्यारा घर,
छोटा ही सही, एक सुंदर घर,
दौड़ती हूँ जहाँ मैं इधर-उधर,
देखती हूँ झरोखे से उन्मुक्त गगन।
करती हूँ उसका खूब जतन 
एक ओर टिमटिमाता दिया,
भीनी सी खुशबू स्नेह भरी।
वो गमलों से आती मिट्टी की सौंधास



शुभा मेहता सितम्बर 2013 से ब्लॉगिंग कर रही है और बचपन से ही पढ़ने की शौकीन है। उनके प्रोफाइल के अनुसार शुभा जी कहती है कि मैं अपने जीवन की छोटी छोटी अनुभूतियों को कविताओं और लेखों में पिरोने की कोशिश करती हूँ।


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01 April, 2018

ध्रुव सिंह ‘एकलव्य’ द्वारा रचित काव्य-संग्रह ‘चीख़ती आवाज़ें’ का लोकापर्ण

  • ब्लॉगर ध्रुव सिंह 'एकलव्य' को उनके प्रथम काव्य संग्रह के प्रकाशन पर iBlogger Team की ओर से ढ़ेरो बधाईयां
  • रविवार को उत्तर प्रदेश मेरठ में ध्रुव सिंह के काव्य संग्रह ‘चीख़ती आवाज़ें’ का लोकापर्ण किया गया


मेरठ। बनारस निवासी ध्रुव सिंह ‘एकलव्य’ द्वारा रचित काव्य-संग्रह चीख़ती आवाज़ें का लोकापर्ण रविवार को किया गया। प्राची डिजिटल पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित काव्य-संग्रह का विमोचन समारोह सहयोगी कंपनी निक्स इंफोटेक के माधवपुरम स्थित कार्यालय पर किया गया।
विमोचन समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार डा. फखरे आलम खान ‘विद्यासागर’ ने काव्य-संग्रह की कुछ कविताओं को पढ़ा और कहा कि इन कविताओं में एकलव्य ने समाज की कुरीतियों पर बहुत ही गंभीरता से चोट किया है। डा.खान ने लेखक ध्रुव सिंह एकलव्य को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मुझे आशा ही नही पूर्ण विश्वास है एकलव्य भविष्य में हिन्दी के सतम्भ के रूप में अपनी जगह बनायेंगे।
इस दौरान प्राची डिजिटल पब्लिकेशन के डायरेक्टर राजेन्द्र सिंह बिष्ट ने कहा कि साहित्य दुनिया में ध्रुव सिंह एक उभरता सितारा है जिनकी कविताओं में आम भाषा का प्रयोग हुआ है। जो वास्तव में एक अच्छा प्रयोग है और इसके अलावा उन्होने समाज की कुरीतियों को बहुत ही प्रभावी ढंग से कविता रूपी माला में पिरोया है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि उन्होने समाज को आईना दिखाने वाला बहुत ही कीमती काव्य-संग्रह दिया है।
राजेन्द्र सिंह बिष्ट डायरेक्टर प्राची पब्लिकेशन ने कहा कि हमारा मकसद उभरती प्रतिभाओं को इंटरनेट एवं प्रिन्ट दुनिया से जोड़कर नये लेखकों को हिन्दी जगत में सम्मान दिलाना है। इस दौरान निक्स इंफोटेक के डायरेक्टर तुषार सिंह, शुभम कुशवाहा, युवा अंग्रजी साहित्यकार डा. अमता खान, अक्षय सिंह व अन्य स्टाफ मौके पर मौजूद रहा।
आपको बताते चलें कि ध्रुव सिंह एक ब्लॉगर भी है जो नियमित रूप से ब्लॉगिंग भी करते है एकलव्य जी दो ब्लॉगों का संचालन करते है। जिनमें एकलव्य और लोकतंत्र संवाद है। उनके इस प्रथम प्रकाशन की खबर को विभिन्न समाचार पत्रों एवं पोर्टलों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया।

आग है लगी हुयी | ब्लॉग ऊंचाईयाँ


जिधर नज़र दौड़ायी
नज़र आया बस कूड़ा ही कूड़ा
कूड़े के ढेर पड़े हुए हैं
जगह -जगह ......
आग लगी हुई है
चमकते चेहरों पर जब
नज़र टिकती है ........
तब नज़र आती है एक आग
आग विचारों रूपी
कूड़े के ढेरो की आग
कूड़ा बस कूड़ा ही कूड़ा
जब गहरायी में उतरा तो
नज़र आयी गंदगी ही गंदगी
गन्दगी में पनपते ज़हरीले जीवाणु .....

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तन्हाई रास आने लगी | ब्लॉग नई सोच


वो तो पुरानी बातें थी
जब हम......
अकेलेपन से डरते थे
कोई न कोई साथ रहे
ऐसा सोचा करते थे
कभी तन्हा हुए तो 
टीवी चलाते,
रेडियो बजाते...
फिर भी चैन न आये तो
फोन करते,
दोस्तों को बुलाते.....
जाने क्यों तन्हाई से डरते थे
पर जब से मिले तुम..!!!
सब बदल सा गया,
बस तेरे ख्यालों में...
मन अटक सा गया..!!!


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सुधा देवरानी जी 2016 से ब्लॉगिग कर रहें है और अपनी कविताओं को नई सोच ब्लॉग के माध्यम से पाठको के बीच रख रहीं है। ब्लॉगर सुधा जी से ई-मेल sdevrani16@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है। 


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तन्हाई | ब्लॉग अभिव्यक्ति


अपनी तन्हाई को 
सीने में समेटे रहती हूँ 
कभी हँस लेती हूँ 
कभी चुपचाप 
कुछ अश्क पी लेती हूँ
कभी पलट पन्ने डायरियों के 
सूखे फूलों की महक लेती हूँ




शुभा मेहता सितम्बर 2013 से ब्लॉगिंग कर रही है और बचपन से ही पढ़ने की शौकीन है। उनके प्रोफाइल के अनुसार शुभा जी कहती है कि मैं अपने जीवन की छोटी छोटी अनुभूतियों को कविताओं और लेखों में पिरोने की कोशिश करती हूँ।


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उम्मीद मन सम्राट है | ब्लॉग मन से


अंत ही आरंभ है,प्रारंभ करता नवसृजन 
उद्देश्य की पूर्ति करे, उम्मीद का पुनः जन्म 
शाश्वत ये सत्य विराठ है, उम्मीद मन सम्राट है 
आरंभ से पहले है वो , वो अंत के भी बाद है 

सृष्टि का सृजन हुआ जिस पल 
जीवन का कोई अर्थ न था 
क़ुदरत की अद्भुत  रचना का 
उद्देश्य कभी भी व्यर्थ न था 
उम्मीद का सूरज जब निकला 
जीवन को एक आकार मिला 
ईश्वर के रूप में मानव को 
क़ुदरत का एक उपहार मिला

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नीतू ठाकुर जी ने अक्टूबर 2017 में ब्लॉग लेखन शुरू किया है। अब तक आप अन्य समूह ब्लॉगों, चर्चा मंचों एवं वेब पत्रिकाओं में निरंतर सक्रिय रहती है।  


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27 March, 2018

एहसास... | ब्लॉग अभिव्यक्ति


बचपन, भोलापन, निष्फिक्र
गाना, नाचना, हँसना, रोना
सब कुछ कितना प्यारा
जैसे जैसे उम्र बढी़
ये सब बातें कब भूल गए
एहसास ही न हुआ
भूल गए वो पल
जो बचपन में जिये
न जाने कहाँ गया वो भोलापन
फिर दौडने लगे




शुभा मेहता सितम्बर 2013 से ब्लॉगिंग कर रही है और बचपन से ही पढ़ने की शौकीन है। उनके प्रोफाइल के अनुसार शुभा जी कहती है कि मैं अपने जीवन की छोटी छोटी अनुभूतियों को कविताओं और लेखों में पिरोने की कोशिश करती हूँ।


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