11 June, 2018

मेघा | ब्लॉग अभिव्यक्ति


मन महक उठा
माटी की सौंधी खुशबू से
बादलों के खुले नलों से 

जब बूँदें गिरी  अवनि पर
भिगो गई सूखी माटी को
कोई भी इत्र इस खुशबू को 
मात नही दे सकता।




शुभा मेहता सितम्बर 2013 से ब्लॉगिंग कर रही है और बचपन से ही पढ़ने की शौकीन है। उनके प्रोफाइल के अनुसार शुभा जी कहती है कि मैं अपने जीवन की छोटी छोटी अनुभूतियों को कविताओं और लेखों में पिरोने की कोशिश करती हूँ।


यदि आप भी अपनी ब्लॉग पोस्ट को अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचाना चाहते है। तो अपने ब्लॉग की नई पोस्ट की जानकारी या सूचना हमें दें। अपनी ब्लॉग की पोस्ट शेयर करने के लिए अपने ब्लॉग पोस्ट का यूआरएल और अपने बारे में संक्षिप्त जानकारी एवं फोटो सहित हमें - iblogger.in@gmail.com पर ई-मेल करें।

09 May, 2018

कहानी अधूरी, अनुभूति पूरी -प्रेम की | ब्लॉग मन के पाखी


उम्र के बोझिल पड़ाव पर
जीवन की बैलगाड़ी पर सवार
मंथर गति से हिलती देह
बैलों के गलेे से बंधा टुन-टुन की
 आवाज़ में लटपटाया हुआ मन
अनायास ही एक शाम
चाँदनी से भीगे 
गुलाबी कमल सरीखी
नाजुक पंखुड़ियों-सी चकई को देख
हिय की उठी हिलोर में डूब गया
कुंवारे हृदय के
प्रथम प्रेम की अनुभूति से बौराया
पीठ पर सनसनाता एहसास बाँधे
देर तक सिहरता रहा तन
मासूम हृदय की हर साँस में 
प्रेम रस के मदभरे प्याले की घूँट भरता रहा
मताया


<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए 'मन के पाखी' ब्लॉग पर जाएं >>>



श्रीमती श्वेता सिन्हा जी ने सन 2017 से ही ब्लॉग लिखना शुरू किया है और तब से लेकर अब तक 150 से ऊपर रचनाएं लिख चुकीं है। उन्होने इतने कम समय में भी ब्लॉग दुनिया में अपनी व अपने ब्लॉग की बेहतर पहचसन बना ली है। वैसे इस पहचान के लिए उनके लेखन को ही इसका श्रेय दिया जा सकता है। उनसे ई-मेल swetajsr2014@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। 


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हद | ब्लॉग अभिव्यक्ति


कितना सरल होता है 
दूसरों के लिए अच्छा
बन जाना....
बस सबका कहा करते चलो
अपनी बात पर अड़ो नही
गलत हो तो भी सह जाओ
हाँ इंसा हो ,क्रोध भी आएगा
पर जरा गरम होकर
ठंडा हो जाना
जरूरी नहीं कि
सच्ची हो सभी बातें
पर बोलने का यहाँ
है मोल ही क्या




शुभा मेहता सितम्बर 2013 से ब्लॉगिंग कर रही है और बचपन से ही पढ़ने की शौकीन है। उनके प्रोफाइल के अनुसार शुभा जी कहती है कि मैं अपने जीवन की छोटी छोटी अनुभूतियों को कविताओं और लेखों में पिरोने की कोशिश करती हूँ।



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03 May, 2018

इंतजार | ब्लॉग अभिव्यक्ति


इंतजार , सभी को होता है 
किसी न किसी चीज़ का
प्रेमी को प्रेयसी का 
परिक्षार्थी को परिणाम का
कृषक को वर्षा का
बच्चों को छुट्टियों का
कलाकार को प्रसिद्धि का 
भूखे को भोजन का
बस ऐसे ही कट जाता है जीवन
इंतजार करते करते




शुभा मेहता सितम्बर 2013 से ब्लॉगिंग कर रही है और बचपन से ही पढ़ने की शौकीन है। उनके प्रोफाइल के अनुसार शुभा जी कहती है कि मैं अपने जीवन की छोटी छोटी अनुभूतियों को कविताओं और लेखों में पिरोने की कोशिश करती हूँ।



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29 April, 2018

जानिए, गरीबों के मसीहा मेडिसिन बाबा के बारे में | ब्लॉग आपकी सहेली


यदि आपसे पुछा जाए कि प्रवचन देने वाले धार्मिक बाबाओं के नाम बताओं? तो मुझे पूरा-पूरा विश्वास हैं कि आप जल्द ही पांच-दस नाम गिना देंगे! लेकिन क्या आप किसी ‘मेडिसिन बाबा’ को जानते हैं? शायद आपका जबाब ना में ही होगा...तो आइए, जानते हैं ऐसे मेडिसिन बाबा के बारे में जो हर महीने लगभग चार से छ: लाख की दवाएं दान में देते हैं! और वो भी तब, जबकि वे स्वयं अमीर नहीं हैं और 82 साल की उम्र में ठीक से चल भी नहीं पाते!!!

कौन हैं ये मेडिसिन बाबा?

मेडिसिन बाबा का असली नाम ओंकारनाथ शर्मा हैं। वे ग्रेटर नोएडा, उत्तर-प्रदेश में स्थित कैलाश अस्पताल के ब्लड बैंक में तकनीशियन के पद पर काम करते थे। 12 वर्ष की आयु में एक कार दुर्घटना के कारण वो दोनों पैरों से अपंग हो गये थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा और एक पोती हैं। दिल्ली जैसे शहर में सिर्फ़ उनकी पेंशन से परिवार का गुजारा बड़ी मुश्किल से होता हैं। फ़िर भी इनका समाजसेवा करने का जज्बा कम नहीं होता! 2008 में दिल्ली के लक्ष्मीनगर में मेट्रो के एक निर्माणाधीन पुल के गिर जाने से दो मजदूर मारे गए और जो जख्मी हुए उनके पास इलाज के लिए और दवा खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। सरकारी अस्पताल के डॉक्टर ऐसी दवाएं लिखते थे जो अस्पताल में मौजूद नहीं होती थी। मजदूर तो सड़क पर ही जिंदगी गुजारते हैं...वे बाजार से महंगी दवा नहीं खरीद सकते थे। तब इन मजदूरों की दयनिय स्थिती देख कर ओंकारनाथ जी का मन द्रवित हो उठा। उसी वक्त उन्होंने ऐसे पीड़ितों के लिए दवाएं जमा करने का संकल्प किया। मेडिसिन बाबा की पहचान उनकी नारंगी रंग की कमीज हैं, जिसपर उनका फोन नंबर एवं उनका मिशन बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा हुआ हैं।


<<< पूरा लेख पढ़ने के लिए 'आपकी सहेली' ब्लॉग पर जाएं >>>



ज्योति देहलीवाल जी एक गृहणी है और महाराष्ट्र में निवारसरत है। आप 2014 से ब्लॉग लिख रही है। उनके ब्लॉग पर विभिन्न विषयों से संबधित रोचक जानकारियां और सामाजिक व घरेलू टिप्स आदि ढ़ेरो जानकारीवर्द्धक लेखो की काफी लम्बी श्रृखला है। ज्योति जी से ई-मेल jyotidehliwal708@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है और उन्हे Facebook पर फालो कर सकते है।


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25 April, 2018

वाह री दुनियाँ | अभिव्यक्ति


दूर के ढोल सुहावने 
पास बजें तो शोर
घर की मुर्गी दाल बराबर
बाहर की अनमोल
कोई अपना ज्ञान बखाने
अधजल गगरी को छलकाए
कोई भैंस के आगे बीन बजाए
पर उसको कुछ समझ न आए
सबको अपना-अपना ध्यान
अपनी ढ़़फली अपना राग




शुभा मेहता सितम्बर 2013 से ब्लॉगिंग कर रही है और बचपन से ही पढ़ने की शौकीन है। उनके प्रोफाइल के अनुसार शुभा जी कहती है कि मैं अपने जीवन की छोटी छोटी अनुभूतियों को कविताओं और लेखों में पिरोने की कोशिश करती हूँ।



यदि आप भी अपनी ब्लॉग पोस्ट को अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचाना चाहते है। तो अपने ब्लॉग की नई पोस्ट की जानकारी या सूचना हमें दें। अपनी ब्लॉग की पोस्ट शेयर करने के लिए अपने ब्लॉग पोस्ट का यूआरएल और अपने बारे में संक्षिप्त जानकारी एवं फोटो सहित हमें - iblogger.in@gmail.com पर ई-मेल करें।

23 April, 2018

मैं नारी खोज रही | ब्लॉग गुफ्तगू


मैं नारी
खोज रही अस्तित्व को
हर उम्र , हर पड़ाव को लांघते
बाहर के अंधेरे से बचते
तो गुम होती
भीतर के स्याह घेरे में
ये कौन सा आसेब ?
जो टिका है, नाभि के नीचे
जो जकड़ लेता है मेरे वजूद को
सहमता हर रोज सन्नाटा में
बना क्यूँ है कमजोर सृजन अंग
आबरू की डोर, ममत्व के संग

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए 'गुफ़्तगू' ब्लॉग पर जाएं >>>



पम्मी सिंह जी 2015 से ब्लॉग लेखन कर रहीं है। इसके अलावा आप अन्य समूह ब्लॉगों, चर्चा मंचों एवं वेब पत्रिकाओं में निरंतर सक्रिय रहती है और अापका एक कविता संग्रह भी प्रकाशित हो चुका है।


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22 April, 2018

कोरा काग़ज़ है, या हसीन ख़्वाब है ज़िन्दगी | ब्लॉग ऊंचाईयाँ


“यूँ तो कोरा काग़ज़ है ज़िन्दगी
ये भी सच है ,कि कर्मों का
हिसाब - किताब है ज़िन्दगी“

“कोरा काग़ज़ है या हसीन ख़्वाब है
ज़िन्दगी
दूर से देखा तो आफ़ताब है ज़िन्दगी
कहीं समतल कहीं गहरी खाई
तो कहीं पहाड़ सी है, ज़िन्दगी“

“पृष्ठ भूमि भी हमारे ही
द्वारा सृजित है।
कर्मों पर ध्यान दे रे बन्दे
जो आज तू करता है
वही तेरा कल बनता है“

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए 'ऊंचाईयां' ब्लॉग पर जाएं >>>



श्रीमती रितु आसूजा जी सन 2013 से ब्लॉग लिख रहीं है और तब से लेकर अब तक प्रेरक और समाजिक लेखन के जरिए ब्लॉग जगत में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। उनसे ई-मेल ritu.asooja1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। 


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हौले से कदम बढ़ाए जा | ब्लॉग नई सोच


अस्मत से खेलती दुनिया में
चुप छुप अस्तित्व बनाये जा
आ मेरी लाडो छुपके मेरे पीछे
हौले से कदम बढ़ाये जा.....

छोड़ दे अपनी ओढ़नी चुनरी,
लाज शरम को ताक लगा
बेटोंं सा वसन पहनाऊँ तुझको
कोणों को अपने छुपाये जा
आ मेरी लाडो छुपके मेरे पीछे 
हौले से कदम बढ़ाए जा....

छोड़ दे बिंंदिया चूड़ी कंगना
अखाड़ा बनाऊँ अब घर का अँगना
कोमल नाजुक हाथों में अब


<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ब्लॉग 'नई सोच' पर जाएं >>>


सुधा देवरानी जी 2016 से ब्लॉगिग कर रहें है और अपनी कविताओं को नई सोच ब्लॉग के माध्यम से पाठको के बीच रख रहीं है। ब्लॉगर सुधा जी से ई-मेल sdevrani16@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है। 


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माँ धरा | ब्लॉग अभिव्यक्ति


हे माँ धरा
कहाँ से लाती हो
इतना धैर्य
कैसे सह लेती हो
इतना जुल्म
इतना बोझ
इतना कूड़ा -कचरा
करते हैं हम मानव
अपनी माँ को
कितना गन्दा
फिर भी बदले में
देती हो तुम
मीठे फल, अनाज
हरे भरे वृक्ष
उनकी छाँव 
समेटे रहती हो




शुभा मेहता सितम्बर 2013 से ब्लॉगिंग कर रही है और बचपन से ही पढ़ने की शौकीन है। उनके प्रोफाइल के अनुसार शुभा जी कहती है कि मैं अपने जीवन की छोटी छोटी अनुभूतियों को कविताओं और लेखों में पिरोने की कोशिश करती हूँ।



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20 April, 2018

हमें जहाँ की कहाँ पड़ी है | ब्लॉग मन से


मरती है तो मर जाने दो 
हमें जहाँ की कहाँ पड़ी है 
पागल है लड़की की माँ 
जो न्याय की खातिर जिद पे अड़ी है 
शोक प्रदर्शन खत्म हो चुका 
अब घरवालों को सहने दो 
प्रेम नगर के वासी हैं हम 
प्रेम नगर में रहने दो 
बहन, बेटियाँ बाजारों में 
बिकती हैं तो बिकने दो
सुंदर और सजीले तन पर
नजर हमारी टिकने दो 
हमको क्या लेना-देना है 
सरहद के गलियारों से 
शोहरत बहुत कमा बैठे हम
कविता के  व्यापारों से 
कोई नही होता अब घायल
शब्दों के हथियारों से 
हमको क्या लेना-देना है

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए 'मन से' ब्लॉग पर जाएं >>>



नीतू ठाकुर जी ने अक्टूबर 2017 में ब्लॉग लेखन शुरू किया है। अब तक आप अन्य समूह ब्लॉगों, चर्चा मंचों एवं वेब पत्रिकाओं में निरंतर सक्रिय रहती है।  


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चलो तुमको उड़ाता हूँ सलोने आसमाँ पे मैं | ब्लॉग मेरी आवाज़


चलो तुमको उड़ाता हूँ सलोने आसमाँ पे मैं
तुम्हारे साथ हूँ हरदम ऐ हमदम! इस जहाँ में मैं

मुझे तुम यूँ भुलाकर तो नही जी पाओगे
जहाँ तेरी नज़र जाएँगी आऊँगा वहाँ पे मैं 

तुम्हारी सादगी पर है निछावर ज़िन्दगी मेरी
मुझे अपना बनाओ तुम महक जाऊँ फिज़ा में मैं

मेरा घर-द्वार कुछ न है, तुम्हारा प्यार है सबकुछ
लिपट कर आ मिलो हमसे कहो आऊँ कहाँ पे मैं




नीलेन्द्र शुक्ल 'नील' जून 2016 से ब्लॉग दुनिया में आए है। ये काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से संस्कृत में स्नातक के छात्र है। आपसे sahityascholar1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।


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17 April, 2018

मोहब्बत खुदा है | ब्लॉग ऊंचाईयाँ


“मोहब्बतों की डोर से बँधे हैं
हम सब
मोहब्बत ना होती तो हम बिखर
 जाते तितर-बितर हो जाते “

“चाहतों की भी एक फ़ितरत है
चाहता भी उसे है ,जो नसीब में
नहीं होता”

कहते हैं की मोहब्बत में इंसान खुदा हो जाता है
    खुदा हो जाता है शायद इसीलिए सबसे
जुदा हो जाता है ।

“ना जाने क्यों लोग मोहब्बत को बदनाम
किया करते हैं ,मोहब्बत तो दिलों में पनपा करती है
मोहब्बत के नाम पर क्यों ?
क़त्ल ए आम किया करते हैं “

“मोहब्बत तो रूह से रूह का मिलन है
मिट्टी का तन सहता सितम है “

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श्रीमती रितु आसूजा जी सन 2013 से ब्लॉग लिख रहीं है और तब से लेकर अब तक प्रेरक और समाजिक लेखन के जरिए ब्लॉग जगत में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। उनसे ई-मेल ritu.asooja1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। 


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डर... | ब्लॉग अभिव्यक्ति


डर, ये तो इक हिस्सा है 
जिंदगी का...
कुछ खोने का.
कुछ न, पाने का
एक अहसास है 
जो सभी को होता है 
बहुत नोर्मल चीज है 
जिंदगी की 
डर, नकारात्मकता नही




शुभा मेहता सितम्बर 2013 से ब्लॉगिंग कर रही है और बचपन से ही पढ़ने की शौकीन है। उनके प्रोफाइल के अनुसार शुभा जी कहती है कि मैं अपने जीवन की छोटी छोटी अनुभूतियों को कविताओं और लेखों में पिरोने की कोशिश करती हूँ।


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11 April, 2018

घर | ब्लॉग अभिव्यक्ति


मेरा घर, प्यारा घर,
छोटा ही सही, एक सुंदर घर,
दौड़ती हूँ जहाँ मैं इधर-उधर,
देखती हूँ झरोखे से उन्मुक्त गगन।
करती हूँ उसका खूब जतन 
एक ओर टिमटिमाता दिया,
भीनी सी खुशबू स्नेह भरी।
वो गमलों से आती मिट्टी की सौंधास



शुभा मेहता सितम्बर 2013 से ब्लॉगिंग कर रही है और बचपन से ही पढ़ने की शौकीन है। उनके प्रोफाइल के अनुसार शुभा जी कहती है कि मैं अपने जीवन की छोटी छोटी अनुभूतियों को कविताओं और लेखों में पिरोने की कोशिश करती हूँ।


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