19 September, 2017

आवाज़ कौन उठाएगा? | ब्लॉग बोल सखी रे


मेरे शब्दों का रंग लाल है 
रक्तिम लाल!
जैसे झूठी मुठभेड़ में मरे 
निर्दोष आदमी का रक्त...
जैसे रेड लाइट एरिया में पनाह ली हुई... 
औरत के सिन्दूर का रंग.
जैसे टी बी के मरीज का खून...
जो उलट देता है अपनी गरीबी...
हर खांसी के साथ.

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अपर्णा बजपेयी जी जम्शेद्पुर में रहती है। आपने 2016 में ही ब्लॉग लेखन शुरू किया है और वर्तमान में झारखंड में आदिवासियों के बीच स्वास्थ, शिक्षा, आजीविका के मुद्दे पर काम कर रहीं है। दैनिक हिन्दुस्तान, जन संदेश टाइम्स, कथाक्रम तथा अन्य कई पत्र पत्रिकाओं में आपकी कविता और कहानियां प्रकाशित हो चुकी हैं।


यदि आप भी अपनी ब्लॉग पोस्ट को अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचाना चाहते है। तो अपने ब्लॉग की नई पोस्ट की जानकारी या सूचना हमें दें। अपनी ब्लॉग की पोस्ट शेयर करने के लिए अपने ब्लॉग पोस्ट का यूआरएल और अपने बारे में संक्षिप्त जानकारी एवं फोटो सहित हमें - iblogger.in@gmail.com पर ई-मेल करें।

नवरात्र में हर दिन नया फलाहार क्या बनाऊं...??? | ब्लॉग आपकी सहेली


दोस्तो, एक दिन उपवास करना हैं तो हम कुछ भी बना लेंगे लेकिन नवरात्र में हर दिन लगातार उपवास करना हो तो...सबसे बड़ी समस्या आती हैं कि नऊ दिन तक फ़लाहार में नए-नए कौन से व्यंजन बनाए जाएं क्योंकि एक ही एक व्यंजन खा-खाकर सभी बोर हो जाते हैं। आजकल सभी को चेंज चाहिए होता हैं। तो क्यों न अब की बार नवरात्र में हम पूरे नवरात्र का मेनु पहले से ही सुनिश्चित कर ले ताकि रोज-रोज फलाहार में क्या बनाएं इस समस्या से छुटकारा मिले! सचमुच, हर दिन का मेनु बनाते‌-बनाते हम गृहिणियों को दिन में भी तारे नजर आने लगते हैं। घर के लोग तो ‘मेनु सुनिश्चिंत करना तुम्हारा काम हैं” कह कर अपना पल्लू झाड़ लेते हैं...इस समस्या से अकेले ही लड़ना पड़ता हैं हम बेचारी गृहिणियों को! कोई बात नहीं...'आपकी सहेली' हैं न! वो करेगी आपकी मदद! यहां पर जिन व्यंजनों की सूची दी जा रहीं हैं उनमें से ज्यादातर व्यंजन बनाना तो आपको आता ही होगा...और जो व्यंजन आपको बनाने नहीं आते हैं उनके लिए भी चिंता करने की कोई बात नहीं हैं क्योंकि आप मेरा यह लेख पढ़ रहे हैं तो इसका मतलब हैं कि आपको इंटरनेट का उपयोग करते आता हैं…और जिसको इंटरनेट का उपयोग करते आता हैं उसके लिए कोई भी व्यंजन बनाना सिखना बाए हाथ का खेल हैं! क्यों, सहीं कह रहीं हूं न मैं?

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ज्योति देहलीवाल जी एक गृहणी है और महाराष्ट्र में निवारसरत है। आप 2014 से ब्लॉग लिख रही है। उनके ब्लॉग पर विभिन्न विषयों से संबधित रोचक जानकारियां और सामाजिक व घरेलू टिप्स आदि ढ़ेरो जानकारीवर्द्धक लेखो की काफी लम्बी श्रृखला है। ज्योति जी से ई-मेल jyotidehliwal708@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है और उन्हे Facebook पर फालो कर सकते है।


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हिंदी भाषा से जुड़े तथ्य | ब्लॉग शर्मा 256 ब्लॉग


1.हिंदी विश्व की एकमात्र ऐसी भाषा है जिसे जैसा बोला जाता है वैसा ही लिखा जाता है।
2.विश्व में लगभग 80 करोड़ लोगों द्वारा हिंदी भाषा बोली जाती है।
3.43 करोड़ भारतीयों के बोलचाल की भाषा है, हिंदी।
4.अंग्रेजी और चीनी के बाद विश्व की तीसरी सबसे बड़ी भाषा है, हिंदी।
5.हिंदी भाषा का इतिहास 1000 वर्ष पुराना है।
6.Google द्वारा 2009 में हिंदी में खोज की सुविधा प्रदान की गई
7.हिंदी में बेब एड्रेस बनाने की सुविधा 2011 में शुरू हुई
8.40 देशों में 600 से अधिक विश्वविद्यालयों और स्कूलों में हिंदी पढ़ाई जाती है।
9.5000 वर्ष पुरानी संस्कृत भाषा में हिंदी की जड़े हैं
10.45 विश्व विद्यालय अकेले अमेरिका में हिंदी की पढ़ाई करते हैं।
11.चीन ने हाल ही में उच्च शिक्षा में हिंदी को बढ़ावा दिया तथा यूरोप में भी हिंदी की शिक्षा दी जा रही है।
12.सर्वप्रथम बिहार ने 1881 मे हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाया।
13.सर्वप्रथम 1833 में गुजरात के महान कवि नर्मद ने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का विचार रखा।
14.केशवचंद्र सेन ने दयानंद सरस्वती को हिंदी अपनाने की सलाह दी,1872 में सत्यार्थ प्रकाश हिंदी में लिखा गया।
15.हिंदी के लिए काशी नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना 1893 मे की गई।
16.1877 में श्रद्धाराम फिल्लौरी ने भाग्यवती नामक हिंदी उपन्यास की रचना की।
17.1918 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने हिंदी राज्य भाषा की बात कही।
18.1930 में शैलेंद्र मेहता द्वारा प्रथम हिंदी टाइपराइटर का विकास किया गया।



मध्य प्रदेश के शिवम शर्मा एक विद्यार्थी है और उन्हाेने जून 2017 से ब्लॉग लिखना शुरू किया है। ब्लॉगर से ई-मेल shivam256sharma@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है। 


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कबीर के 15 दोहे जो हमें जीने का तरीका सिखाते हैं | ब्लॉग ज्ञान वर्षा


महात्मा कबीर एक ऐसी शख्शियत (personality) थे जो जात पात, ऊँच-नीच, छोटा बड़ा, अमीर गरीब जैसी चीजों से, समाज में व्याप्त कुरीतियों (curiosities) से, सामाजिक विसंगतियों (anomalies) से बहुत दूर थे। वह ना तो हिन्दू थे और न ही मुसलमान। वो राम की भक्ति भी करते थे और रहीम की भी। कबीर ने आज से लगभग 600 साल पहले ही सामाजिक विसंगतियों, कुरीतियों, धर्म के नाम पर होने वाली लडाई, हिन्दुओं के कर्मकांडों, पाखंडों, मुसलमानों की धर्मान्धता पर अपने विचारों के जरिये कुठराघात किया था।
कबीरदास ने अपने विचारों को, अपने चिंतन को, अपने उपदेशों को दोहों के रूप में प्रस्तुत किया था। 600 साल बाद आज भी उनके द्वारा कही गयी बातें, उनके विचार , उनके दोहे उतने ही प्रभावशाली है, उतने ही सच्चे हैं, उतने ही ज्ञानवर्धक है, और उतने ही ज़रूरी हैं जितने तब थे। उन्होंने अपने दोहों के जरिये समाज को एक ऐसा आइना दिखाया है, एक ऐसा सन्देश दिया है जिससे लोग अपने मन के अंधकार को दूर करके, अपने आप को एक सच्चा, निर्मल, निश्छल और एक बेहतर इन्सान बना सकते हैं।
उनके दोहों को पढ़कर, उनके विचारों को पढ़कर मन का अंधकार ख़त्म होता है, जीने की नयी राह मिलती है, हर मुश्किल आसान लगने लगती है, मन मिर्मल हो जाता है।

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पुष्पेन्द्र कुमार सिंह जी ग्रेटर नोएडा से है और लगभग दो वर्षो से ब्लॉग दुनिया में सक्रिय है। जो ज्ञान वर्षा ब्लॉग का संचालन कर रहे है। ज्ञान वर्षा ब्लॉग पर आप बेहतरीन माेटिवेशनल लेख पढ़ सकते है। ब्लॉगर से ई-मेल gyanversha1@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है और उन्हे Facebook पर फालो कर सकते है।


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साथ तुम्हारे हूँ | ब्लॉग मन के पाखी



निर्मल,कोमल, उर प्रीत भरी
हूँ वीतरागी,शशि शीत भरी,
मैं पल पल साथ तुम्हारे  हूँ।

रविपूंजों की जलती ज्वाला
ले लूँ आँचल में,छाँव करूँ,
कंटक राहों के चुन लूँ सारे
जीवन के भँवर में नाव बनूँ,
हर बूँद नयी आशा से भरी
मैं पल पल साथ तुम्हारे हूँ।

जीवन पथ के झंझावात में
थाम हाथ, तेरे साथ चलूँ

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श्रीमती श्वेता सिन्हा जी ने सन 2017 से ही ब्लॉग लिखना शुरू किया है और तब से लेकर अब तक 150 से ऊपर रचनाएं लिख चुकीं है। उन्होने इतने कम समय में भी ब्लॉग दुनिया में अपनी व अपने ब्लॉग की बेहतर पहचसन बना ली है। वैसे इस पहचान के लिए उनके लेखन को ही इसका श्रेय दिया जा सकता है। उनसे ई-मेल swetajsr2014@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। 


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14 September, 2017

जाने कब खत्म होगा, ये इंतज़ार... | ब्लॉग नई सोच


ये अमावस की अंधेरी रात
तिस पर अनवरत बरसती
ये मुई बरसात..
और टपक रही मेरी झोपड़ी
की घास-फूस...
भीगती सिकुड़ती मिट्टी की दीवारें 
जाने कब खत्म होगा  ये इन्तजार?
कब होगी सुबह...?
और मिट जायेगा ये घना अंधकार!
थम ही जायेगी किसी पल फिर यह बरसात

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सुधा देवरानी जी 2016 से ब्लॉगिग कर रहें है और अपनी कविताओं को नई सोच ब्लॉग के माध्यम से पाठको के बीच रख रहीं है। ब्लॉगर सुधा जी से ई-मेल sdevrani16@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है। 


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हिंदी | ब्लॉग मन के पाखी


बचपन से जाना है हिंदी
भारत के भाल की बिंदी है।

राष्ट्र की खास पहचान
हिंदी भाषी अपना नाम
गोरोंं ने जो छोड़ी धरोहर
उसके आगे हुई चिंदी है।

हिंदी भाषा नहीं भाव है
संस्कृति हमारी चाव है
सबको एक सूत्र में जोड़े
कश्मीरी हो या सिंधी है।

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श्रीमती श्वेता सिन्हा जी ने सन 2017 से ही ब्लॉग लिखना शुरू किया है और तब से लेकर अब तक 150 से ऊपर रचनाएं लिख चुकीं है। उन्होने इतने कम समय में भी ब्लॉग दुनिया में अपनी व अपने ब्लॉग की बेहतर पहचसन बना ली है। वैसे इस पहचान के लिए उनके लेखन को ही इसका श्रेय दिया जा सकता है। उनसे ई-मेल swetajsr2014@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। 


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ईश्वर प्रद्युम्न के माता-पिता को दु:ख सहने की शक्ति दे | ब्लॉग आपकी सहेली


आज टीवी चैनल पर, अखबारों में और सोशल मीडिया पर सभी तरफ़ प्रद्युम्न के साथ हुई दिल दहलाने वाली घटना छाई हुई हैं। जब-जब टीवी पर मासूम प्रद्युम्न का चेहरा दिखता हैं रुह कांप जाती हैं मेरी! कितना प्यारा और कितना मासूम दिख रहा हैं प्रद्युम्न! कितना निर्दयी राक्षस होगा उसका हत्यारा! क्या उसका दिल थोड़ा सा भी नहीं पसीजा होगा इतने मासूम बच्चे का कत्ल करते वक्त! कहां से लाया होगा उस हत्यारे ने इतना कठोर हृदय? क्या बीत रही होगी प्रद्युम्न के माता-पिता पर? सोच कर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उन्हें सांत्वना देने के लिए किसी के भी पास शब्द नहीं हैं। उनके दु:खी हृदय के नीरव क्रंदन से पूरे देशवासियों के अंतरात्मा की श्रवणेन्द्रिया लहुलुहान हो गई हैं। उन्हें क्या पता था कि जिस बच्चे को वे स्कूल में अच्छा-भला तंदुरुस्त छोड़ आए हैं सिर्फ़ आधे घंटे बाद उस बच्चे की खून से लथपथ लाश देखने को मिलेगी! सचमुच, हम सब उनके दु:ख की सिर्फ़ कल्पना भी नहीं कर सकते!
कितना दर्द सहती हैं एक माँ...बच्चे को गर्भ में पालते वक्त...फ़िर बच्चे को जन्म देते समय...और बच्चे के जन्म के बाद तो माता-पिता की पूरी दुनिया ही बच्चे के इर्द-गिर्द सिमट जाती हैं। बच्चे के हंसने से माता-पिता हंसते हैं और बच्चे को जरा सी चोट आने से वे खुद दर्द से तड़प जाते हैं। किसी भी चोट से जितना दर्द बच्चे को स्वयं को नहीं होता होगा उतना दर्द माता-पिता को होता हैं। जब बच्चा थोड़ा सा बड़ा होता हैं तब बच्चे को स्कूल भेजते वक्त खासकर माँ को बहुत तकलीफ़ होती हैं। क्योंकि अभी तक जागते-सोते, खाते-पीते, सुबह-शाम और रात-दिन बच्चा माँ के इर्द-गिर्द ही घुमता रहता हैं। बच्चा पूरी तरह अपनी माँ पर ही निर्भर रहने से बच्चे को स्कूल भेजते वक्त माँ को एक अनजाना भय सताते रहता हैं की अब उसका बच्चा उसके बिना स्कूल में कैसे रहेगा...बच्चा स्कूल में रोएगा तो नहीं...उसे भूख तो नहीं लगी होगी...स्कूल के अन्य लड़के और लड़कियां उसे तंग तो नहीं करेंगे...इन्हीं सब भयों के साथ हर माँ अपने दिल पर पत्थर रख कर अपने कलेजे के टुकड़े को स्कूल भेजती हैं।

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ज्योति देहलीवाल जी एक गृहणी है और महाराष्ट्र में निवारसरत है। आप 2014 से ब्लॉग लिख रही है। उनके ब्लॉग पर विभिन्न विषयों से संबधित रोचक जानकारियां और सामाजिक व घरेलू टिप्स आदि ढ़ेरो जानकारीवर्द्धक लेखो की काफी लम्बी श्रृखला है। ज्योति जी से ई-मेल jyotidehliwal708@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है और उन्हे Facebook पर फालो कर सकते है।


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12 September, 2017

माँ क्या कोई अभागी कभी डोली नही चढ़ती ? | ब्लॉग @अभि


जब भी देखती हूँ अपने सूने पाँवों को 
टीस सी उठती है मन में 
मुझे भी अपने पाँवों में 
महावर लगानी है,
सुननी है वो छम-छम 
जो मेरे पाँव की पायलों से हो,
भले ही इन कलाईयों को 
खानदानी कंगन न मिले 
पर उस घर के बुजुर्गों का 
आशीष तो मिले 
जिस घर मेरी डोली जाएगी,
मेरा ब्याह कही दूर देश कर दे 
मैं आते-जाते तुझसे मिलती रहूंगी,
माँ, मेरे लिए दूल्हा मत ढूँढना 
जो सेहरे के पीछे छुपा 
महज एक चेहरा हो,
मुझे तो जीवनसाथी चाहिए,
मेरा मन, मेरी देह 
मेरा सर्वस्व उसका,
वो भी मुझे घर की लक्ष्मी माने,
उसकी राह तकूँगी

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लखनऊ निवासी अभि अभिलाषा जी ने सन 2017 से ही ब्लॉग लिखना शुरू किया है और तब से लेकर अब तक 100 से ऊपर रचनाएं लिख चुकीं है। उनसे ई-मेल abhi.abhilasha86@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। 


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कद्दू के गुलगुले | ब्लॉग आपकी सहेली


गुलगुले तो लगभग हर घर में बनते हैं लेकिन क्या आपने कद्दू के गुलगुले खाए हैं? साधे गुलगुलो की तुलना में कद्दू के गुलगुले ज्यादा स्वादिष्ट लगते हैं। तो आइए, आज हम बनाते हैं कद्दू के गुलगुले...

आवश्यक सामग्री-

• गेहूं का आटा- 1 बाउल
• कद्दू (कद्दूकस किया हुआ)- 1 बाउल
• चीनी या गुड़- 1/2 बाउल
• खसखस- 1 छोटी चम्मच
• तेल या घी- तलने के लिए

बनाने की विधि-

• आटे को छान लीजिए।
• एक बड़े बाउल में आटा, कद्दुकस किया हुआ कद्दू, चीनी और खसखस डालिए।
• पानी डाल कर पकौडे जैसा घोल तैयार कीजिए। घोल गाढ़ा ही रखिएगा क्योंकि चीनी भी पानी छोडती हैं। पानी लगभग आधे बाउल से भी कम लगेगा। दस मिनट के लिए घोल को ढककर रख दीजिए ताकि आटा अच्छे से फूल जाए।
• दस मिनट बाद फ़िर से इस घोल को अच्छे से फ़ेटिए।

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चाँद | ब्लॉग मन के पाखी


चाँद आसमान से बातें करता ऊँघने लगा
अलसाकर बादलों के पीछे आँखें मूँदने लगा
नीरवता रात की मुस्कुरायी सितारों को चूमकर
ख्वाबों मे तेरी आहट फिजां में संगीत गूँजने लगा

चाँदनी रातों को अक्सर छत पे चले जाते है 
वो भी देखते होगे चंदा सोच सोच मुस्कुराते है
पलकों के पिटारे मे बंद कर ख्वाब नशीले
उनकी यादों के आगोश में गुम हम सो जाते है

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श्रीमती श्वेता सिन्हा जी ने सन 2017 से ही ब्लॉग लिखना शुरू किया है और तब से लेकर अब तक 150 से ऊपर रचनाएं लिख चुकीं है। उन्होने इतने कम समय में भी ब्लॉग दुनिया में अपनी व अपने ब्लॉग की बेहतर पहचसन बना ली है। वैसे इस पहचान के लिए उनके लेखन को ही इसका श्रेय दिया जा सकता है। उनसे ई-मेल swetajsr2014@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। 


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सत्य धर्म | ब्लॉग शर्मा 256 ब्लॉग


धर्म,
वर्तमान समय के परिपेक्ष में देखा जाए तो इस शब्द की सार्थकता को पूर्णता बदल कर इसे एक राजनीतिक मुद्दे के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है।वर्तमान समय में इसे धर्म नहीं बल्कि कुछ राजनेताओं द्वारा एक वोट बैंक के नजरिए से देखा जाता है।हमारे देश के संविधान के तहत हमारे देश के समस्त नागरिकों को धर्म और उपासना की स्वतंत्रता प्राप्त है,वर्तमान में धर्म का अर्थ पूर्णतः परिवर्तित हो चुका हैं,हमारे देश में विभिन्न जाति और संप्रदाय के लोग रहते हैं।वर्तमान समय में लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है,हमें अपने स्वार्थ के लिए वह राजनेता धर्म के नाम पर बांटते हैं जिन्हें स्वयं ही धर्म का वास्तविक अर्थ नहीं पता है।वर्तमान में कुछ ढोंगी साधु संत जो ईश्वर का डर दिखाकर आस्था के लिए आकर्षित करते है,ऐसे ढोंगी बाबा संत हमें तो गृहस्थ त्याग कर ईश्वर की भक्ति में लीन होने की शिक्षा देते हैं, परंतु स्वयं इस भौतिकवाद से लिप्त हैं।पूर्व समय में साधु संत गृहस्थ का त्याग इसलिए करते थे ताकि वह इस भौतिकवादी दुनिया से दूर सिर्फ ईश्वरीय ज्ञान को प्राप्त कर सके। परंतु वर्तमान में ढोंगी साधु व ढोंगी बाबाओं ने ईश्वरीय ज्ञान को व्यापारिक रूप दे दिया है।कहा जाता है ईश्वर के सामने सब समान है परंतु वर्तमान में मंदिरों में ईश्वर के दर्शन के लिए भी VIP को अधिक प्राथमिकता दी जाती है,कुछ मूर्ख ढोंगी भक्त ईश्वर के मंदिरों में दान देकर उसका गुणगान करते हैं,दान श्रध्दा के लिए दिया जाता है न कि उसका गुणगान करने के लिए, जबकि मूर्ख यह नहीं जानते कि वह उस ईश्वर को क्या देगे जो स्वयं समस्त जग का पालनहार है।यह ढोंगी साधु अपने अंधविश्वासी भक्तों द्वारा देश की कानून व्यवस्था को भी चुनौती दे देते हैं।
"ऐसे श्रद्धावान भक्तों की अपेक्षा नास्तिक लोग भले जो कम से कम धर्म के नाम पर लोगों के लिए हानिकारक तो नहीं।"
तथा देश के कुछ मूर्ख राजनेता जो अपने स्वयं के स्वार्थ के लिए ऐसे महत्वपूर्ण समयो पर भी अपनी घटिया राजनीति करने से नही चूकते है।साधु-संत ईश्वरी ज्ञान प्राप्ति के सरल मार्ग होते है,उनका कार्य ईश्वर के भक्तों का ज्ञान प्राप्ति के लिए पथ प्रदर्शित करना है परंतु वर्तमान समय में यह ढोंगी साधु संत स्वयं को ईश्वर की संज्ञा देकर स्वयं अपने भक्त बनाते हैं।



मध्य प्रदेश के शिवम शर्मा एक विद्यार्थी है और उन्हाेने जून 2017 से ब्लॉग लिखना शुरू किया है। ब्लॉगर से ई-मेल shivam256sharma@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है। 


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तू चली आ, तू चली आ, तू चली आ अब यहाँ | ब्लॉग मेरी आवाज


मैं अधूरे ख़्वाब लेकर के बता जाऊँ कहाँ
तू चली आ, तू चली आ, तू चली आ अब यहाँ-2

तू चला आ, तू चला आ , तू चला आ अब यहाँ-2

मैं कहूँ कैसे तुम्हारी आरज़ू हमको नही
चाहता हूँ मैं तुम्हें तुमसे बग़ावत है नही
किस कदर तुमसे कहूँ अपने दिलों की दास्ताँ।। तू चली आ...

छुप-छुपा कर देखता तुझको शज़र की छाँव में
डूब जाता हूँ मैं अक्सर उस शहर, उस गाँव में
हैं तेरी यादें यहाँ करती मेरे मौसम जवाँ।। तू चली आ...

आज हो जैसे युँ ही रहना सदा तुम उम्रभर
ज़िन्दगी आसान होगी कट सकेगा ये सफर
साथ ग़र देती रही बनता रहेगा आशियाँ।। तू चली आ...



नीलेन्द्र शुक्ल 'नील' जून 2016 से ही ब्लॉग दुनिया में आए है। ये काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से संस्कृत में स्नातक के छात्र है। आपसे sahityascholar1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।


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11 September, 2017

फ़लसफ़ा | ब्लॉग ऊंचाईयाँ


खिले-खिले पुष्पों से ही घर, आँगन महकते है,
प्रकृति प्रदत्त, पुष्प भी किसी वरदान से कम नहीं
अपने छोटे से जीवन में पूरे शबाब से खिलते हैं पुष्प
और किसी न किसी रूप में काम आ ही जाते हैं
जीवन हो तो पुष्पों के जैसा, छोटे से सफ़र में बेहद की
हद तक उपयोगी बन जाते हैं।

जीवन का भी यही फ़लसफ़ा है,
बुझे हुए चिरागों को किनारे कर,
जलते हुए चिरागों से ही घर रोशन किये जाते हैं।
क्योंकि जो जलता है, वही जगमगाता है।

कभी-कभी यूँ ही मुस्करा लिया करो
गीत गुनगुना लिया करो।
जीवन का संगीत हमेशा
मधुर हो आवयशक नहीं।

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए 'ऊंचाईयां' ब्लॉग पर जाएं >>>



श्रीमती रितु आसूजा जी सन 2013 से ब्लॉग लिख रहीं है और तब से लेकर अब तक प्रेरक और समाजिक लेखन के जरिए ब्लॉग जगत में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। उनसे ई-मेल ritu.asooja1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। रितु जी काे फेसबुक पर फालों करने के लिए यहां क्लिक करें।


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लक्ष्य का निर्धारण | शर्मा 256 ब्लॉग


लक्ष्य,
हम सभी ने मनुष्य रूप में इस पृथ्वी पर जन्म लिया है।भारतीय शास्त्र के अनुसार हमें मनुष्य का शरीर हमारे पूर्व जन्मों के कर्मों के आधार पर प्राप्त होता है तथा हमारे पूर्व जन्म के कर्म ही हमारे पुनर्जन्म का निर्धारण करते हैं। जिस धरती पर हमने जन्म लिया है यह हमारी कर्मभूमि कहलाती है हम इस धरती पर कर्म करने आए हैं महाभारत काल में श्रीकृष्ण ने भी गीता के उपदेश में अर्जुन से कहा है कि "हे,अर्जुन तुम कर्म करो फल की चिंता मत करो।"
हम सभी अपने जीवन में कुछ न कुछ प्राप्त करना चाहते हैं। हमारा सबका कोई न कोई ध्येय है। हम सभी इस बहुमूल्य जीवन को व्यर्थ नहीं गंवाना चाहते। हमें जीवन को सार्थक बनाने के लिए जीवन में कुछ न कुछ लक्ष्य का निर्धारण करना होता है।
वर्तमान समय में हम लक्ष्य निर्धारण स्वयं की तर्कशक्ति से नहीं करते हम दूसरे के लक्ष्य को अपना लक्ष्य बनाते हैं लक्ष्य का निर्धारण स्वयं के दिलचस्पी के आधार पर करना चाहिए नाकि दूसरों को देख कर भेड़-चाल का हिस्सा बनना चाहिए।



मध्य प्रदेश के शिवम शर्मा एक विद्यार्थी है और उन्हाेने जून 2017 से ब्लॉग लिखना शुरू किया है। ब्लॉगर से ई-मेल shivam256sharma@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है। 


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