11 January, 2016

अस्थायी ई-मेल का उपयोग कर पाईये फायदे ही फायदे

दशकों से कंप्यूटर, इंटरनेट पर जुड़े होने के कारण कई मित्र और परिचित तरह तरह की समस्याएं, जिज्ञासाएं लिए आते हैं. कईयों का लगाव अनूठे तरीके और जुगाड़ से है तो उसी का समाधान करने की जुगत में मुझे भी नई बातें सीखने मिल जाती हैं .

इस बार एक मित्र के किशोर बेटे ने दस्तक दी अपनी समस्या ले कर. बचपन से वो मुझे देखता मिलता रहा है तो एक स्वाभाविक संकोच नहीं हुआ उसे अपनी बात कहने में.

उसका कोई मित्र है जिससे किसी मामले में कहा-सुनी हो गई थी. नतीजतन उस मित्र ने इस किशोर को व्हाट्स एप्प पर ब्लॉक कर दिया, ई-मेल में एंट्री रोक दी, मोबाइल पर ब्लैक लिस्ट कर दिया, मिलना बंद कर दिया.

अब यह किशोर चाहता था कि किसी भी तरह से उस तक वह अपना पक्ष पहुंचा सके तो गलतफहमियां दूर होने की पूरी उम्मीद है.  किसी तरह की चिट्ठी रूक्के का सवाल ही नहीं, किसी अन्य के हाथ लग जाए तो उसे मिलेगा भी नहीं जगहंसाई का अलग भय.  करे तो करे क्या वह.

बातचीत के बाद मैंने उसे सलाह दी कि वह डिस्पोजेबल ई-मेल का उपयोग कर उसे ई-मेल भेज दे.  अगर उसने सही समझा तो पक्का संपर्क करेगा, चाहे जैसे भी करे.

डिस्पोजेबल ई-मेल मतलब अस्थायी ई-मेल! एक ऐसा ई-मेल पता जिसे बस्स एक बार ही इस्तेमाल किया जा सकता है, उसके बाद वह गायब. जैसे कि चाय-कॉफ़ी पीने के लिए डिस्पोजेबल ग्लास! पानी पीने का काम हो जाए तो गिलास फेंक दिया जाता है. दुबारा वह गिलास नहीं मिलने वाला अपने उसी रूप में.

या फिर जैसे काम निकालने के लिए अस्थायी शिक्षक होते हैं, कर्मचारी होते हैं या फिर अस्थायी राशनकार्ड होता है. काम ख़त्म, भूल जाओ कि कौन था? किधर गया? कब तक रहा?

वह हैरान था कि अगर डिस्पोजेबल ई-मेल से उसे ई-मेल भेजी तो वापस ज़वाब कहाँ मिलेगा? मैंने समझाया कि तुम्हारा संदेश पहुँच जाएगा फिर अगले ने ज़वाब देना होगा तो कैसे भी दे देगा!


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