06 July, 2016

Best Blogger of the Month June - 2016 - Kavita Rawat

विषम परिस्थितियों में हुई कविता जी के लेखन की शुरुआत


बेस्ट ब्लॉगर ऑफ द मंथ जून के लिए iBlogger टीम द्वारा कविता रावत का चयन किया गया है, जिनका जन्म 8 जून 1968 को झीलों की नगरी भोपाल में हुआ है। वर्तमान में वे मध्यप्रदेश राज्य की राजधानी भोपाल जिले में निवास कर रही है। इन्होंने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में शिक्षा विभाग, भोपाल में कार्यरत है। कविता जी 2009 से ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय है। कविता जी ने अपने ब्लॉग शीर्षक से स्पष्ट किया है कि- "ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ।" 
यह बात उनकी सीधे और सरल शब्दों में प्रभावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत पहली ब्लॉग पोस्ट "सबको नाच नचाता पैसा" जो कि 2 अगस्त, 2009 को प्रकाशित है, में स्पष्ट रूप से देखने को मिलती है। अब तक कविता जी 232 लेख/ब्लॉग पोस्ट लिख चुकी है। इसके साथ ही उनके लेख और ब्लॉग की चर्चाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में छपती रहती है।
उनके ब्लॉग की जानकारी के अनुसार कविता जी कहती है कि, 'भोपाल गैस त्रासदी की मार झेलने वाले हजारों लोगों में से एक हूँ। ऐसी विषम परिस्थितियों में मेरे अंदर उमड़ी संवेदना से लेखन की शुरुआत हुई, शायद इसीलिए मैं आज आम आदमी के दुःख-दर्द, ख़ुशी-गम को अपने करीब ही पाती हूँ, जैसे वे मेरे अपने ही हैं।'

उनके इस दर्द की बानगी 2 दिसम्बर, 2011 में प्रकाशित उनके ब्लॉग से लिए गए एक पोस्ट में पढ़ सकते है...

"पिछले 15-20 दिन से भोपाल से बाहर रहने के कारण नेट से दूरी बनी रही। अभी दिसंबर माह शुरू हुआ तो भोपाल गैस त्रासदी का वह भयावह मंजर आँखों में कौंधने लगा। अपनी आँखों के सामने घटी इस त्रासदी के भयावह दृश्य कई वर्ष बाद भी दिन-रात आँखों में उमड़ते-घुमड़ते हुए मन को बेचौन करते रहे। उस समय अपनी भूल अक्सर उन पीड़ित घर-परिवारों की दशा देख-सुनकर मन बार-बार उन्हीं के इर्द-गिर्द घूम-घूम कर व्यथित हुए बिना नहीं रह पाता था और जब-जब कोई भी पीड़ित व्यक्ति अपनी व्यथा सुनाता था तो मन गहरी संवेदना से भर उठता और क्या करें, क्या नहीं की उधेड़बुन में खोकर  बेचैन हो जाता। कई बार सोचा कि उस घटना का अपने ब्लॉग पर विस्तृत वर्णन करुँगी लेकिन अब तो आलम यह है व्यस्तता के चलते कब दिसंबर का माह आ जाता है पता ही नहीं चलता। फ़िलहाल ऐसे ही हालातों में उन दिनों की लिखी एक आँखों देखी त्रासद भरी जीवंत घटना का काव्य रूप प्रस्तुत कर रही हूँ...

वो पास खड़ी थी मेरे
दूर कहीं की रहने वाली,
दिखती थी वो मुझको ऐसी
ज्यों मूक खड़ी हो डाली।
पलभर उसके ऊपर उठे नयन
पलभर नीचे थे झपके,
पसीज गया यह मन मेरा
जब आँसू उसके थे टपके।
वीरान दिखती वो इस कदर
ज्यों पतझड़ में रहती डाली,
वो मूक खड़ी थी पास मेरे
दूर कहीं की रहने वाली।।
समझ न पाया मैं दुरूख उसका
जाने वो क्या चाहती थी,
सूनापन दिखता नयनों में
वो पल-पल आँसू बहाती थी।
निरख रही थी सूनी गोद वह
और पसार रही थी निज झोली
जब दुरूख का कारण पूछा मैंने
तब वह तनिक सहमकर बोली-
‘छिन चुका था सुहाग मेरा
किन्तु अब पुत्र-वियोग है भारी,
न सुहाग न पुत्र रहा अब
खुशियाँ मिट चुकी है मेरी सारी।’
‘असहाय वेदना’ थी यह उसकी
गोद हुई थी उसकी खाली,
वो दुखियारी पास खड़ी थी 
दूर कहीं की रहने वाली।।"

कविता जी का ब्लॉग सामाजिक, धार्मिक एवं प्रेरक जानकारियों से भरपूर लेखों से परिपूर्ण है। उन्होने अपनी कविताओं में शब्दों के बेहतरीन संयोजन से संजीवता प्रदान की है। वहीं उन्होने सामाजिक समस्याओं को भी अपने ब्लॉग के माध्यम से पाठक के सामने रखने का प्रयास किया है। 
कविता जी के अनुसार कि यह ब्लॉग मेरे लिए एक सामाजिक मंच है जहाँ पर वे स्वयं को विश्वव्यापी परिवार के सदस्य के रूप में देख पाती हूँ, जिस पर अपने मन/दिल में उमड़ते-घुमड़ते खट्टे-मीठे, अनुभवों व विचारों को बांट पाने में समर्थ हो पा रही हूँ।
कविता जी का एक लघु कविता संग्रह ‘लोक उक्ति में कविता’ कल्पना पब्लिकेशन, जयपुर द्वारा प्रकाशित किया गया है। कविता जी से उनके ई-मेल kavitarawatbpl@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है और उनके ब्लॉग को पढ़ने के लिए यहां http://kavitarawatbpl.blogspot.in पर जाये।

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