16 August, 2016

कौन किसका है - Hindi Moral story


मैंने सुना है, एक फकीर के पास एक युवक आता था। वह युवक कहता था कि मुझे भी संन्यास की यात्रा करनी है। सूफियों के रंग-ढंग मन को भाते है। लेकिन क्या करूॅं, पत्नी है और उसका बड़ा प्रेम है। क्या करूॅं बच्चें हैं, और उनका मुझसे बड़ा लगाव है। मेरे बिना वे न जी सकेंगे। मैं सच कहता हूॅं, वे मर जाएॅंगे। मैं पत्नी से संन्यास की बात भी करता हूॅं तो वह कहती हैं, फांसी लगा लूॅंगी।
उस फकीर ने कहा, ‘तू ऐसा कर। कल सुबह मैं आता हूॅं। तू रातभर, एक छोटा-सा प्रयोग देता हूॅं, इसका अभ्यास कर ले और सुबह उठकर एकदम गिर पडना।‘ प्रयोग दिया सांस को साधने का कहा इसका रातभर अभ्यास कर ले, सुबह तू सांस साध कर पड जाना। लोग समझेंगे, मर गया। फिर बाकी मैं समझा लूॅंगा।
उसने कहा, चलो। क्या हर्ज़ है? देख लें करके। क्या होगा इससे?
महात्मा ने कहा की तुझको इससे दिखाई पड़ जाएगा। कौन-कौन तेरे साथ मरता है। पत्नी मरती है, बच्चे मरते, पिता मरते, माॅं मरती, भाई मरते, मित्र मरते कौन-कौन मरता है, पता चल जाएगा। एक दस मिनट तक सांस साध कर पड़े रहना हे, बस। सब ज़ाहिर हो जाएगा। तू मौजूद रहेगा, तू देख लेना, फिर दिल खोलकर सांस ले लेना, फिर तुझे जो करना हो कर लेना।
वह मर गया सुबह। सांस साध ली। पत्नी छाती पीटने लगी, बच्चे रोने लगे, माॅं-बाप चीखने लगे, पड़ोसी इकटठे हो गये। वह फकीर भी आ गया इसी भीड में भीतर। फकीर को देखकर परिवार के लोगों ने कहा कि आपकी बड़ी कृपा, इस मौके पर आ गये। परमात्मा से प्रार्थना करो। हम तो सब मर जाएंगे। बचा लो किसी तरह। यह हम सबके सहारे थे।
फकीर ने कहा, घबराओ मत। यह बच सकता है। लेकिन मौत जब आ गयी तो किसी को जाना पडे़गा। तो तुम में से जो भी जाने को राजी हो, वह हाथ उठा दे। वह चला जाएगा यह बच जाएगा। इसमें देर नहीं है, जल्दी करो।
एक-एक से पूछा। पिता से पूछा। पिता ने कहा, अभी तो बहुत मुश्किल है। मेरे और भी बच्चे हैं कोई यह एक ही मेरा बेटा नहीं हैं। उनमें कई अभी अविवाहित है। कोई अभी स्कूल में पढ़ रहा है। मेरा होना तो बहुत जरूरी है, मैं कैसे जा सकता हॅू।
माॅं ने भी कुछ बहाना बताया। बेटों ने भी कहा कि हमने तो अभी जीवन देखा ही नहीं। पत्नी से पूछा, पत्नी के आसु एकदम रूक गये। उसने कहा, अब ये तो मर ही गये और हम किसी तरह चला लेंगे । अब आप झंझट न करो और।
फकीर ने कहा, अब उठ। तो वह आदमी आॅंख खोलकर उठ गया। उसने कहा, अब तेरा क्या इरादा है? उसने कहा, अब क्या इरादा, आपके साथ चलता हॅू। ये तो मर ही गये। अब ये लोग चला लेंगे। देख लिया राज़ समझ गये, सब बातों की बात थी। कहने की बातें थीं।

Moral: कौन किसके बिना रूकता है। कौन कब रूका है। कौन किसको रोक पाया है।
दृष्टि आ जाए तो वैराग्य उत्पन्न होता है। उस घड़ी उस युवक ने देखा। इसके पहले सोचा था बहुत। इस घड़ी दर्शन हुआ।

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