15 August, 2016

आखिर इस आज़ादी से हमें क्या मिला?

आज़ादी : क्या खोया, क्या पाया?


15 अगस्त याने स्वतंत्रता दिन के आसपास सोशल मीडिया पर देश की सकारात्मक छबी से ज्यादा नकारात्मक छबी पेश करनेवाली पोस्ट्स प्रकाशित होती है। वो सब पढ़कर मन में स्वाभाविक सवाल आता है कि आखिर इस आज़ादी से हमें क्या मिला? हमारे पूर्वजों ने क्या इसी आज़ादी के लिए खून बहाया था? हताशा में कई बुजुर्ग तो यहां तक कह देते है कि इससे तो अंग्रेजों का शासन ही अच्छा था! जिस देश में आए दिन बहन-बेटियों पर बलात्कार हो, युवा देश हित के कार्यों के बजाय सिर्फ नारेबाज़ी कर कर रातों रात हीरो बनना चाहते हो, वहां ये सवाल मन में उठना स्वाभाविक है। हाल ही में कश्मीर के संदर्भ में नरेंद्र मोदी जी ने कहा है कि “जिन युवाओं के हाथों में किताबें और लैपटॉप होने चाहिए, मन में सपने होने चाहिए, उनके हाथों में पत्थर होते है!”
आज कुछ मुट्ठी भर लोग, हम सवा सौ करोड़ भारतीयों की बुद्धि को ललकार रहें है। वो हमें क्षेत्रीयता और जातियता के नाम पर उकसा रहें है। और हम सवा सौ करोड़ भारतीय असलियत जानते-समझते हुए भी उनके चंगुल में फँस रहें है। आज अफ़ज़ल गुरु, बुरहान वानी जैसों को शहीद बताना, भारत माता की जय बोलना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बन गई है। ट्रेन हो, मॉल हो या बाजार हो, कब छिपाकर रखा बम फट जाएगा बता नहीं सकते। सुबह घर से निकला इंसान, शाम को सही-सलामत घर लौटेगा की नहीं कुछ गारंटी नहीं। हमारे नेता लोग भी युवाओं को ज्यादा से ज्यादा रोज़गार देने के तरफ अपना ध्यान लगाने के बजाय युवाओं को आरक्षण का छूनछूना थमा रहें है।
इन सब बातों से ऐसा लगता है कि हमारे देश में सब गलत ही गलत हो रहा है। कहीं भी, कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा है। लेकिन हमें यह समझना होगा कि ये सब बातें सिक्के की सिर्फ एक बाज़ू है! हमारा मीडिया नकारात्मक खबरों को प्राधान्य देता है इसलिए हमारे मन में भी देश की नकारात्मक छबी पनपती है। सिक्के की दूसरी बाज़ू इससे और अधिक उजली एवं साफ है। कितने भी बिगड़े हालात पर हम खुलकर लिख-बोल सकते है, ये क्या कम है? किसी महान व्यक्ति ने कहा है “ये मत सोचों कि इस देश ने तुम्हें क्या दिया, बल्कि ये सोचों तुमने देश को क्या दिया?” ये पंक्तियां हमें हमारी जिम्मेदारियों का एहसास कराती है। जे एन यू में छात्र संघ ने जिस तरह से देशद्रोह के नारे लगाए, क्या ऐसे नारे लगाने की आज़ादी होनी चाहिए?

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ज्योति देहलीवाल जी एक गृहणी है और महाराष्ट्र में निवारसरत है। आप 2014 से ब्लॉग लिख रही है। उनके ब्लॉग पर विभिन्न विषयों से संबधित रोचक जानकारियां और सामाजिक व घरेलू टिप्स आदि ढ़ेरो जानकारीवर्द्धक लेखो की काफी लम्बी श्रृखला है। जिससे पाठक लाभान्वित हो सकते है।

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