21 September, 2016

Blogger Ajay Kumar Jha Become a Member of iBlogger

ब्लॉगर अजय कुमार झा iBlogger के सदस्य बने


इस सप्ताह अजय कुमार झा जी आई-ब्लॉगर के सदस्य (लेखक) के रूप में जुड़े है। 9 मई, 1973 को जन्में अजय जी की शिक्षा केंद्रीय विद्यालयों में पूरी हुई है और पिताजी फ़ौजी थे इसलिए नियमित स्थानान्तरण के कारण लगभग पूरे भारत में भ्रमण कर चुके है और माता जी गृहणी है। इसके साथ ही उनके परिवार में उनके एक बड़े भाई भी है।
अजय जी ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से अंग्रेजी विषय के साथ स्नातक है, खुद को साबित और स्थापित करने के उद्देश्य से वर्ष 1996 में दिल्ली आ गये थे। पत्रकारिता में डिप्लोमा लेने के दौरान वर्ष 1998 में सरकारी सेवा में नियुक्ति हो गई। वर्तमान में दिल्ली की अधीनस्थ जिला न्यायालय में बतौर वरिष्ठ न्यायिक सहायक पद पर कार्यरत है और साथ ही विधि की शिक्षा भी जारी है।
अजय जी 2008 से ‘कोर्ट कचहरी’ नाम से ब्लॉग लिख रहे है जहां पर आपको कोर्ट और कचहरी से संबधित ढ़ेर सारी उपयोगी जानकारी मिलेगी, वो भी हिन्दी में, क्योंकि इस तरह की ब्लॉग बहुत कम होते है अगर होते भी तो वे अंग्रेजी में होते है। यहां पर उन्होने प्रयास किया है कि पाठक उनके ब्लॉग से खाली हाथ न जाने पाये।

‘कोर्ट कचहरी’ ब्लॉग को पढ़ने के लिए क्लिक करें

इसके साथ ही वे 2007 से ‘बुकमार्क’ नाम के ब्लॉग का संचालन भी कर रहे है, जहां पर उन्होने विभिन्न सामाजिक मुद्दों और यात्रा संस्मरण को विशेष स्थान दिया है। यहां पर आप विभिन्न पर्यटन स्थलों की जानकारी भी ले सकते है जो कि नये पर्यटक के लिए बेहतरीन ब्लॉग साबित हो सकता है।

‘बुकमार्क’ ब्लॉग को पढ़ने के लिए क्लिक करें

अजय जी कहते है कि पढने-लिखने का शौक कब हुआ, यह मुझे नहीं ठीक-ठीक नही मालूम है। वे कहते है कि मै कभी भी विद्यालय में मेधावी छात्र नहीं रहा, मगर बचपन में कॉमिक्स, लड़कपन में विजय विकास, कर्नल रंजीत, गुलशन नंदा जैसे उपन्यासों के बाद, जहां शैक्षणिक पाठ्यक्रम ने अंग्रेजी साहित्य के करीब किया तो बाद में हिंदी साहित्य दिल के भीतर तक बस गया। उन्होने बताया कि संपादक के नाम हज़ारों पत्र, दोस्तों को सैकडों चिट्ठियां लिखने की आदत ने आगे जाकर लेख, कहानियां, कविताएं, व्यंग्य पढना और लिखना आदत बन गये और अब एक जुनून बन गए हैं। अब तो लगता है कि जिंदगी कम है और किताबें ज्यादा तो जिंदगी खत्म होने से पहले जितना पढूं, जितना लिखूं कम है।

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