22 September, 2016

आई-ब्लॉगर के साथ जुड़ी - ब्लॉगर रेखा श्रीवास्तव

नवोदित लेखक और ब्लॉगर रेखा जी के अनुभवों से उठा सकेंगे लाभ


इस सप्ताह गुरूवार को ब्लॉगर रेखा श्रीवास्तव जी आई-ब्लॉगर के साथ बतौर लेखक सदस्य जुड़ी है। रेखा जी का जन्म 07 जुलाई, 1955 को बुंदेलखण्ड के उरई कस्बे हुआ था। शिक्षा दीक्षा भी वही हुई। स्वभाव की संवेदनशीलता ने कलम हाथ में थमा दी जबकि लेखन और अध्ययन उन्हे पिता से विरासत में मिला। कहानी, कविता और लेखों में सामान्य रुचि रखती है। जब ये अर्न्तजाल या ब्लॉग नही हुआ करते थे तब आपके लेख स्तरीय पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे और बाद में अपने ब्लॉग के लिए लेखन करने लगी। उनके कविताएं कई साझा कविता सग्रहों में प्रकाशित हो चुकी है। रेखा जी 24 सालों तक आईआईटी कानपुर में मशीन अनुवाद में रिसर्च एसोसिएट के पद पर कार्यरत रही है और अब वर्तमान में काउंसलर है।

रेखा जी के ब्लॉग से एक पोस्ट पाठकों के लिए पेश है, इसके साथ ही हम आपको बता दें कि पाठकों, नवोदित रचनाकारों और ब्लॉगरों को रेखा श्रीवास्तव जी के अनुभवों से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।


आठ वर्ष ब्लॉगिंग के - मेरा सरोकार

आज मुझे अपने ब्लॉग को शुरु किये हुए आठ वर्ष हो गये। बहुत कुछ सीखा और अपने पाँच ब्लॉग बनाये हैं, अलग अलग उद्देश्य से। ईमानदारी से कहूँगी कि कुछ वर्षों तक तो उनके साथ न्याय कर पायी फिर कुछ  अन्य कार्यों में व्यस्तता और सामाजिक सरोकार में वृद्धि से समय कम दे पायी। 
इस बीच ब्लॉगिंग में भी गुटबाजी का असर देखा और लंबी लंबी कमेंट वाली लड़ाई भी देखी। हम कभी बोले जहाँ देखा कि बोलना जरूरी है। बहुत सहयोगी ब्लॉगर साथी हैं सभी। मैंने कई परिचर्चायें आयोजित की और सबसे बहुत सहयोग मिला। किसी ने ये नहीं सोचा कि नयी हूँ तो अपने विचार क्यों दें? लेकिन समकक्ष मानकर सबने जो साथ दिया अभिभूत हुई।
एक कटु अनुभव भी रहा, एक सामूहिक ब्लॉग ने मुझे अध्यक्ष बनाया और शायद सोचा था कि एक रबड़ स्टाम्प मिल गया। मैं पहले से उसकी सदस्य थी और फिर कुछ साथियों ने मना किया कि मैं इस पद को स्वीकार न करूँ क्योकि संस्थापक ही सर्वोपरि हैं। फिर भी मैंने चुनौती स्वीकार की और उस ब्लॉग के अतीत को देखते हुए सबसे पहले एक आचार संहिता बना कर ब्लॉग पर डाली और सबको मानने का अनुरोध भी था। कुछ दिन चला फिर वही वैमनस्य बुढ़ाने वाली पोस्ट आने लगी और आचार संहिता ताक पर। कई बार विनम्र अनुरोध के बाद भी कुछ रुका नहीं और मैंने पूरी तरह त्यागपत्र दे दिया।
फेसबुक के जलवे बढ़ने के साथ ब्लॉग के लिए अच्छा साबित नहीं हुआ और त्वरित प्रतिक्रिया को देखने के लालच ने सब कुछ वहीं केन्द्रित कर दिया। ब्लॉग सूने हो गये। हम सभी दोषी हैं इसके लिए और नवें वर्ष में प्रवेश के साथ ही रोज न सही लेकिन ब्लॉग पर निरन्तर लिखने के लिए प्रतिबद्धता स्वीकार करती हूँ और सभी ब्लॉग पर जाकर पढ़ने का भी प्रयास करूँगी। हम ही एक दूसरे के हौसले को बढ़ाने का काम करेंगे।

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रेखा श्रीवास्तव जी पिछले आठ वर्षो से ब्लॉग की दुनिया में सक्रिय है और पांच ब्लॉगस का संचालन कर रही है। उन्होने अब तक लगभग 1000 पोस्ट लिखी है। रेखा जी से ई-मेल rekhasriva@gmail.com एवं फोन 09936421567, 09307043451 पर भी सम्पर्क किया जा सकता है और उन्हे FACEBOOK पर फॉलो करें।


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