02 September, 2016

Digamber Naswa - Best Blogger of the Month for August 2016


दिगम्बर नासवा जी मुबारक हो! i Blogger टीम द्वारा अगस्त 2016 के लिए ‘‘Best Blogger of the Month’’ में आपका चयन किया गया है। दिगम्बर जी पिछले दस वर्षाे से निरन्तर ब्लॉग दुनिया में सक्रिय है और हिन्दी साहित्य के अथाह सागर के विस्तार के लिए अपना अमूल्य समय निकालकर योगदान कर रहे है।
दिगम्बर जी 2006 से ‘स्वप्न मेरे’ ब्लॉग का लेखन व संचालन कर रहे है। अपने ब्लॉगिंग सफर के दौरान उन्होने 367 पोस्ट लिखी है। उन्होने अपने ब्लॉग की पहली पोस्ट 27 दिसम्बर 2006 को अपने ब्लॉग के शीर्षक के अनुरूप ही लिखी। जो भले ही दो लाईन की हो लेकिन ब्लॉग के मकसद को स्पष्ट कर दिया।

‘‘स्वप्न मेरे कुछ भूले बिसरे 
कागज को तरसे बरसों।’’

दिगम्बर जी का जन्म 20 दिसंबर 1960 को कानपुर में हुआ, बचपन आगरा और फरीदाबाद मे बीता है। उनके विकास में उनकी माता जी स्व. शीला नासवा जी का विशेष योगदान रहा उनकी शिक्षा कुरुक्षेत्र विद्यालय, फरीदाबाद में हुई है। पेशे से चार्टेड अकाउंटेंट दिगम्बर जी की कुछ रचनाएं विभिन्न संकलनों में प्रकाशित हो चुकी है। दिगम्बर जी लगभग 16 वर्षाे तक दुबई में भी रहे। वे विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में लेखन करते रहे है और 2010 परिकल्पना ब्लोगोत्सव में “सर्वश्रेष्ठ गज़ल लेखन पुरस्कार” से भी नवाजे जा चुके है। उनके ब्लॉग की पंच लाईन के अनुसार ‘जीवन के अनुभव को कविता या गज़ल के माध्यम से कहने का प्रयास करता हूँ’।
अपने ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से उन्होने बचपन की यादों को ताजा करने की कोशिश की है। अक्सर उन्हे पढ़कर आपको भी अपना बचपन की अठखेलियां याद आ जाये। गुजरते समय को भी उन्होने अपनी लेखनी में समेटने का भरपूर प्रयास किया है जो कभी लौट कर नही आता है।
यही नही, मोहब्बत और इश्क के मायने हो या अंजाम, मां की ममता और इंसानियत के साथ ही उन्होेने जिन्दगी में रिश्तों की परिभाषा को शब्दों के बेहतरीन संयोजन व माला की तरह पिरोकर उनकी अहमियत को बताया है, जिससे शब्दों के प्रति उनके ज्ञान को समझा जा सकता है। दिगम्बर जी ने कविताओं व गज़ल के अतिरिक्त अन्य किसी विद्या की और अपना रूख नही किया, उन्होने इसी विद्या को माध्यम बनाकर अपने मन की भावनाओं को ब्लॉग के रूप में समाज के सामने रखा है। उन्होने हर संभव प्रयास किया है कि उनकी रचनाओं में समाज का हर तबके को स्थान मिले और उनके जीवन व संघर्ष को बखूबी शब्दों में उतारा है।
स्वप्न मेरे ब्लॉग पर 08 मई 2011 को प्रकाशित एक रचना ‘‘माँ’’ में उन्होने माँ की सादगी और सहज जीवन का सजीव वर्णन किया है, तो वहीं, माँ की मौजूदगी के महत्व को भी सुन्दर शब्दों के संयोजन से सृजित किया है। माँ के प्रति उनका प्रेम, उनकी छटपटाहट, उनके जाने का दर्द अंतस को भिगो देता है। यह रचना इतनी भावुक करने वाली है कि इससे आगे कुछ कहने को हमारे पास शब्द नहीं मिल रहे है।

आप भी भावुक कर देने वाली यह रचना जरूर पढ़े...


मैने तो जब देखा अम्मा आँखें खोले होती है
जाने किस पल जगती है वो जाने किस पल सोती है।

बँटवारे की खट्टी मीठी कड़वी सी कुछ यादें हैं,
छूटा था जो घर आँगन उस पर बस अटकी साँसें हैं।
आँखों में मोती है उतरा पर चुपके से रोती है,
जाने किस पल जगती है वो जाने किस पल सोती है।। 

मंदिर वो ना जाती फिर भी घर मंदिर सा लगता है,
घर का कोना कोना माँ से महका महका रहता है।
बच्चों के मन में आशा के दीप नये संजोती है,
जाने किस पल जगती है वो जाने किस पल सोती है।

चेहरे की झुर्री में अनुभव साफ दिखाई देता है,
श्वेत धवल केशों में युग संदेश सुनाई देता है।
इन सब से अंजान वो अब तक ऊन पुरानी धोती है,
जाने किस पल जगती है वो जाने किस पल सोती है।

दिगम्बर जी ने आई ब्लॉगर टीम को बताया कि विगत कुछ वर्षों में हिंदी ब्लोगर्स का रुख अन्य अन्य सोशल मीडिया की तरफ ज्यादा बढ़ा है जिसके चलते ब्लॉग लेखन में कुछ कमी आई है, पर निरंतर नए लेखक और पुराने लेखकों की वापसी से और गंभीर लेखन की वजह से ब्लॉगिंग का महत्त्व आने वाले समय में बढ़ने वाला है। इसके साथ ही आई ब्लॉगर जैसे अति महत्वपूर्ण संस्थानों ने जिस तरह से ब्लॉगिंग को प्रोत्साहित किया है वो काबिले तारीफ़ है ...मुझे पूर्ण विश्वास है कि आने वाले समय में ब्लॉगिंग का भविष्य उज्वल है। दिगम्बर नासवा जी से ई-मेल dnaswa@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है और आप उन्हे Facebook पर भी Digamber Naswa फालो कर सकते है।

दिगम्बर जी के ब्लॉग 'स्वप्न मेरे' को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 



हमारे साथ जुड़े रहे और हम आपको अगले माह मिलवाएंगे एक नये ब्लॉगर से। यदि आप भी स्वयं को या किसी मित्र को नॉमिनेट करना चाहते है हमें iblogger.in@gmail.com पर ई-मेल करें।

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