01 September, 2016

महिलाओं के कपड़ो तक अटकी है समाज की सोच

अक्सर ज्योति देहलीवाल जी द्वारा लिखी गई पोस्ट उम्दा और ताजगी से भरपूर होती है, जिनमें अधिकतर जानकारीवर्द्धक होती है, तो वहीं कुछ प्रेरक, तो कुछ खट्टी-मीठी भी होती है। अक्सर ज्योति जी की कलम कभी-कभी ऐसे मुद्दो पर आवेश में आकर ज्वाला उगलती है, जैसे- समाज में उड़ती हुई बहस और कुरीतियों के खिलाफ समाज के नजरिये को देखते हुए या ताजे मुद्दे जो महत्वहीन हो लेकिन वो फिर भी समाज में अधिक टीआरपी पा रहे है। देहलीवाल जी, अक्सर अपने ब्लाॅग के माध्यम से समाज को अपने लेखों के माध्यम से कड़वी लेकिन समाज के लिए फायदेमंद डोज देती रहती है। पढ़े उनका नया लेख...




महिलाओं को इतनी तो आजादी दो कि वे अपनी इच्छा से कपड़े पहन सकें!

सोशल मीडिया पर, अखबारों में, टेलीविजन पर, जहां देखो वहां महिलाओं ने क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं पहनना चाहिए इस पर ढेरों बयानबाजी हो रहीं है। जैसे-

“विदेशी महिला सैलानी भारत में स्कर्ट पहनकर न घुमें”

“पी वी सिंधु भी न...देखो मंदिर जाने के लिए साड़ी पहन ली”

“लड़के न बहके इसलिए रोहतक के स्कूल में स्कर्ट बैन”

ऐसी बयानबाजी देख-सुनकर दिमाग सुन्न हो जाता है! कहां तो हम चाँद और मंगल पर जाने की बातें करते है, नारी-पुरुष समानता की बातें करते है और कहां हमारी सोच, महिलाओं के कपड़े के इर्द-गिर्द ही भटकती रहती है! अरे...थोड़ा महिलाओं को भी सांस लेने दो...इतनी तो आज़ादी दो उन्हें कि वे अपनी इच्छा से कपड़े पहन सकें!! कुछ पुरुष तो इससे भी आगे जाकर कहते है कि लड़कियों ने जीन्स नाभी से नीचे नहीं पहननी चाहिए...साड़ी की ब्लाउज के गले ज्यादा डीप नहीं रखने चाहिए! इससे पुरुषों की भावनाएं उत्तेजित होती है। लड़कियों के पहनावे पर टिप्पणी करनेवाले कुछ बुजुर्ग ऐसे भी है, जिनकी खुद की बेटियां आधुनिक लिबास पहनती है, लेकिन दूसरी लड़कियों/ महिलाओं को वे शालीनता का पाठ पढ़ाते है। महिलाओं को शालीनता का पाठ पढ़ानेवाले ये बुजुर्ग ये नियम अपने घर की बहू-बेटी पर लागू नहीं करते! जैसे कश्मीर के अलगाववादी गरीब कश्मीरी बच्चों के हाथों में पत्थर थमाते है और खुद के बच्चों को कश्मीर से दूर सुरक्षित जगहों पर रखते है!
जब भी कहीं महिलाओं के साथ बर्बरता की कोई खबर सुर्खियों में आती है, तो बिना किसी शुरवाती जानकारी के लोगों की पहली प्रतिक्रिया यहीं होती है कि यह सब आधुनिकता का तकाजा है, महिलाएं भड़काऊ कपड़े पहनती है इसलिए...! क्या वास्तव में छेड़खानी, बलात्कार की सभी घटनाएँ सिर्फ छोटे और आधुनिक कपड़े पहनने से ही होती है? हाल ही में हुए बुलंदशहर गैंगरेप में क्या उन माँ-बेटी ने भडकाऊं कपड़े पहन रखें थे? सादे कपड़े में और परिवारवालों के साथ रहने पर भी क्यों हुआ उनके साथ गैंगरेप? दो-तीन साल की मासूम बच्चियों पर क्यों होते है बलात्कार? दरअसल नारी अपना कितना शरीर दिखाएं या कितना छिपाएं, यह महत्वपुर्ण नहीं है, क्योंकि कामभावना मस्तिक में जन्म लेती है और...

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