03 October, 2016

Ritu Asuja - Best Blogger of the Month for September 2016


सितम्बर माह के लिए आई-ब्लॉगर द्वारा बेस्ट ब्लॉग ऑफ द मंथ डा. वर्षा सिंह (ब्लॉग- वर्षा सिंह और श्रीमती रश्मि बरनवाल (ब्लॉग- एक नई दिशा) को चुना गया था। जिनमें से एक का चयन किया जाना था, लेकिन दोनो ब्लॉगरों को सूचना भेजने के बाद भी कोई जवाब नही मिल पाया, जिस कारण हमें उन्हे रद कर तीसरी प्रबल दावेदार श्रीमती रितु आसुजा जी का चयन करना पड़ा। क्योंकि इस कंपेन हेतु हमें पूरे माह ब्लॉगरो के ब्लॉग का अध्ययन करना होता है तब जाकर उनमें से कुछ ब्लॉग को छांटकर उनके बारे में जानकारी जुटाकर उन्हे संपादित कर उन्हे दुबारा से उनके संज्ञान हेतु ई-मेल द्वारा सूचित किया जाता है ताकि उन्हे ज्ञात हो सके कि उनके बारे में दिये गये तथ्य सत्य है या गलत। यदि गलत है तो उनके द्वारा संपादित किये जा सकें।
उसी प्रक्रिया में हमारी टीम द्वारा ब्लॉग ऑफ द वीक के लिए चुने गये ब्लॉग ‘ऊंचाईयां’ ब्लॉग की लेखिका व संचालिका श्रीमती रितु आसुजा को अपने ब्लॉग के प्रति समपर्ण और लेखन की प्रतिबद्धता को देखते हुए बेस्ट ब्लॉगर ऑफ द मंथ, सितम्बर 2016 के लिए चयनित किया गया है। 11 जून, 1968 को मसूरी में जन्मी श्रीमती रितु आसूजा जी सन 2013 से ब्लॉग दुनिया में आई है और तब से लेकर अब तक प्रेरक और समाजिक लेखन के जरिए ब्लॉग जगत में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। रितु जी हिन्दी और अंग्रेजी के अलावा पंजाबी भाषा भी जानती है और उन्होने ग्रेजुएशन की शिक्षा प्राप्त की है।
लगभग चार वर्षो से ब्लॉग लेखन कर रहीं रितु जी के अधिकतर रचनाओं को कविताओं के माध्यम से प्रस्तुत करने का प्रयास करती है। उन्होने अपनी रचनाओं में जीवन के खट्टे-मीठे प्रेरक अनुभवों को उतारा है, जिनका शब्द संयोजन बेहतरीन है। इसके अलावा जीवन के मायने, सामाजिक बुराईयां, त्यौहार की उमंग को भी अपनी रचनाओं में स्थान दिया है। वहीं उनकी बहुत ही कम पोस्ट में राजनीति की झलक दिखाई देती है। ऐसा लगता है कि जैसे वो भी भगवा रंग में रंग गई है। खैर यह तो लेखक की इच्छा पर निर्भर होता है कि वह पाठक को किस नजरिए से क्या दिखाना चाहता है। हम तो बस चुटकी ले रहे थे। उनके ब्लॉग के बारे में अधिक जानकारी के लिए ‘ब्लॉग ऑफ द वीक ऊंचाईयां’ में पढ़े।
आईए! उनके ब्लॉग से 31 मार्च, 2016 को प्रकाशित एक पोस्ट जिसका शीर्षक है ‘मै इंसान’ पर एक नजर डालते है कैसे उन्होने एक इंसान के मन की भावनाओं और जज्बातों को बखूबी बयां किया है...

ना जाने क्यों भटक जाता हूँ
अच्छा खासा चल रहा होता हूँ ‘मैं’
पर ना जाने क्या होता है ,
ना जाने क्यों राहों के बीच मे ही उलझ जाता हूँ ‘मै’
जानता हूँ, ये तो मेरी राह नहीं,
मेरी मंजिल का रास्ता यहाँ से होकर तो नहीं जाता,
फिर भी न जाने क्यों आकर्षित हो जाता हूँ ‘मैं’
भटक जाता हूँ ‘मैं’ हासिल कुछ भी नहीं होता
बस यूँ ही उलझ जाता हूँ ‘मै’ फिर निराश-हताश
वापिस लौटकर अपनी राहों की और आता हूँ ‘मैं’
फिर आत्मा को चौन मिलता है।
अपनी राह से कभी ना भटक जाने की सौगंध लेता हूँ ‘मैं’
जीवन एक सुहाना सफ़र है।
‘मैं’ मुसाफिर अपने किरदार में 
सुंदर-सुंदर रंग भरना चाहता हूँ ‘मैं’ 
बस हर दिल मैं प्यार भरना चाहता हूँ ‘मैं’
बस जिन्दगी के नाटक मे 
अपना किरदार बखूबी निभाना चाहता हूँ ‘मै’

वर्तमान में ऋषिकेश में निवास कर रहीं रितु जी ने हमें बताया कि बचपन से ही मेरी चाह रही है कि मै कुछ ऐसा करूं जिससे लोग मुझे मेरे इस दूनियां से चले जाने के बाद भी याद रखे। मैं संत कबीर, लेखक प्रेमचन्द सहित कई महान लेखकों के जीवन चरित्र व लेख पड़कर बहुत प्रभावित हुई। जिससे मैने भी फैसला कर लिया कि मुझे भी लेखन की दुनिया में अपनी एक पहचान और जगह बनानी है, बस फिर क्या था, मैने भी चीटी की तरह चलना शुरू कर दिया और अब तक बहुत सारी कहानियाँ, लेख व कविताएं इत्यादि लिखे, जिनमें कुछ प्रकाशित भी हुए। उन्होने कहा कि यह डगर बहुत आसान न थी, लेकिन फिर भी लिखना नहीं छोड़ा। धीरे-धीरे ही सही पर मंजिल का रास्ता मिलता गया।
रितु जी वर्तमान में दैनिक समाचार पत्र अमर उजाला के ब्लॉग कॉलम की लेखिका भी है और उनकी रचनाएं कई प्रतिष्ठित समाचार पत्र व पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है। जिनमें से कई रचनाएं पुरस्कृत भी हो चुकी है।रितु जी से ई-मेल ritu.asooja1@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है और उन्हे फेसबुक पर भी फालो कर सकते है।

रितु आसूजा जी के ब्लॉग ‘ऊचाईयां’ को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 



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