12 November, 2016

सवेरा (कविता - अभिव्यक्ति ब्लॉग से)


उठो जागो मन.....
हुआ नया सवेरा
आ गये आदित्य
लिए आशा किरन नई 
रमता जोगी ,गाए मल्हार
झूम रहे खग वृंद
नाचे गगन अपार
कलियाँ चटक उठी
चटक कर


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शुभा मेहता सितम्बर 2013 से ब्लॉगिंग कर रही है और बचपन से ही पढ़ने की शौकीन है। उनके प्रोफाइल के अनुसार शुभा जी कहती है कि मैं अपने जीवन की छोटी छोटी अनुभूतियों को कविताओं और लेखों में पिरोने की कोशिश करती हूँ।


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