18 March, 2017

मेरा 'अंश' आगे बढ़ा...!!! | आपकी सहेली


दोस्तो, कहीं आपको यह तो नहीं लग रहा कि शिर्षक लिखने में मुझसे गलती हो गई और मैने गलती से 'वंश' की जगह 'अंश' लिख दिया! जी नहीं, मैने बिलकुल सही लिखा है और आपने बिलकुल सही पढ़ा है। मेरा 'अंश' आगे बढ़ा...! जब बेटे को बेटा होता है तब हम कहते है मेरा 'वंश' आगे बढ़ा...। लेकिन जब बेटी को बेटी होती है तब हम क्या कहेंगे? क्या बेटी में अपना अंश नहीं होता? और क्या बेटी के बेटी में अपना अंश नहीं है? यह बात तो विज्ञान भी मानता है कि बच्चे में उसके नाना-नानी का अंश आता है। इसलिए ही मैने कहा की मेरा 'अंश' आगे बढ़ा...!
हां दोस्तो, 11 मार्च 2017 का दिन मेरे लिए एक विशेष खुशी का पैगाम लेकर आया। इस दिन मैं एक नन्हीं सी परी की नानी बन गई, नानी...! कितना अच्छा लगता है न यह संबोधन! विश्वास ही नहीं होता...कल तक जो खुद एक बच्ची थी, वो आज इतनी बड़ी हो गई कि एक बच्ची की माँ बन गई! कभी-कभी मन में विचार आता है कि जिस लड़की से यदा-कदा बुखार आने पर क्रोसिन की एक गोली गीटक के नहीं होती थी...वो लड़की डिलीवरी में इतनी गोलियां कैसे गीटकती होगी? कैसे सहन किया होगा उसने इतना दर्द? उसकी नॉर्मल डिलीवरी हुई है। उस वक्त तो बहुत दर्द होता है...कैसे सहा होगा ये दर्द मेरी बच्ची ने?

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ज्योति देहलीवाल जी एक गृहणी है और महाराष्ट्र में निवारसरत है। आप 2014 से ब्लॉग लिख रही है। उनके ब्लॉग पर विभिन्न विषयों से संबधित रोचक जानकारियां और सामाजिक व घरेलू टिप्स आदि ढ़ेरो जानकारीवर्द्धक लेखो की काफी लम्बी श्रृखला है। ज्योति जी से ई-मेल jyotidehliwal708@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है और उन्हे Facebook पर फालो कर सकते है।


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