20 March, 2017

फर्क | अभिव्यक्ति


बंगले मे रहने वाली मेमसाब से पूछा महाराज ने,
आज कया बनेगा?
पालक पनीर या पनीर टिक्का,
बिरयानी और साथ में खीर भी,
मैडम बोली, हां बनालो सभी कुछ।
उधर, झोपड़ी में भी सवाल वही था,
आज क्या बनेगा?जाकर रसोई में देखूँ
कुछ पडा है क्या? थोड़े से चावल या थोडा सा आटा।
मिटा सकूं मै जिससे भूख अपने परिवार की।




शुभा मेहता सितम्बर 2013 से ब्लॉगिंग कर रही है और बचपन से ही पढ़ने की शौकीन है। उनके प्रोफाइल के अनुसार शुभा जी कहती है कि मैं अपने जीवन की छोटी छोटी अनुभूतियों को कविताओं और लेखों में पिरोने की कोशिश करती हूँ।


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