30 April, 2017

अंंधविश्वास छोडिए...अंगदान या देहदान कीजिए | ब्लॉग आपकी सहेली


हम ज़िंदगी भर अपने-आप को कोसते रहते हैं कि ज़िंदग़ी में कुछ अच्छा करना चाहते थे लेकिन कर नहीं पाएं! काश, हम भी कुछ अच्छा कर पाते...काश, हम भी दान धर्म कर कर पुण्य कमा पाते...! क्या आपके मन में भी कभी-कभी ऐसे विचार आते है? यदि हां, तो अंधविश्वास छोडिए...अंगदान या देहदान कीजिए...!
अंगदान एवं देहदान में अंतर
शरीर के उपयोगी अंग जैसे आंखों की कॉर्निया, लीवर, हड्डी, त्वचा, फेफड़े, गुर्दे, दिल, टिश्यू इत्यादि का दान करना अंगदान कहलाता है। जबकि अपना संपूर्ण शरीर मेडिकल प्रयोग या अध्ययन हेतु दान देने को देहदान कहते है। एक शोध के अनुसार एक व्यक्ति द्वारा किए गए अंगदान से 50 जरुरतमंद लोगों कि मदद हो सकती है, तो देहदान से चिकित्सा में विकास से पूरी मानव जाती लाभान्वित हो सकती है।
अंगदान या देहदान सर्वश्रेष्ठ दान है
अंगदान से जीवन मिलता है। सिर्फ़ भगवान ही नहीं, हम भी किसी को जीवन दे सकते है! यह सभी दानों में सर्वश्रेष्ठ है। अंगदान के बिना देश में हर वर्ष 5 लाख मौते होती है। भारत में हर वर्ष जितने अंगो की आवश्यकता होती है उनमें से केवल 4% ही उपलब्ध हो पाते है। विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार पश्चिमी देशों में 70-80% अंगदान होता है जबकि भारत में यह आंकड़ा सिर्फ़ 0.01% का है। आप ही सोचिए...जिस देश में एक कबुतर की जान बचाने के लिए राजा शिबि ने अपने जीवित शरीर को गिद्ध के लिए परोस दिया था, असुरो से रक्षार्थ महर्षि दधीचि ने अपनी अस्थियां दान कर दी थी, राजा ययाति के पुत्र पुरु ने अपना यौवन पिता को दान में दिया था, दानवीर कर्ण ने जीते जी अपने कवच-कुंडल दान में दिए थे, उसी भारत देश के लोग अंगदान या देहदान के मामले में इतने उदासीन कैसे हो सकते है? यदि महर्षि दधीचि जैसे धर्मज्ञ अपनी अस्थियां दान कर सकते है तो हमें डरने का कोई कारण नहीं है।
क्या हम इतने स्वार्थी है?
जरा सोचिए, यदि हमने अंगदान नहीं किया तो हमारा शरीर, क्या तो जलाया जाएगा या फ़िर दफ़नाया जाएगा। दोनों ही परिस्थिति में हमारे शरीर को तो नष्ट होना ही है। वो शरीर हमारे या हमारे परिवार वालों के कुछ भी काम नहीं आएगा। साथ ही किसी और के भी कुछ भी काम नहीं आएगा। ये तो यहीं बात हुई कि यदि कोई चीज हमारे काम की नहीं है तो हम उसे जलायेंंगे, दफनायेंगे या कुछ भी करेंगे लेकिन किसी को भी उसका उपयोग नहीं करने देंगे! क्या आज का पढ़ा-लिखा इंसान इतना स्वार्थी है?

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ज्योति देहलीवाल जी एक गृहणी है और महाराष्ट्र में निवारसरत है। आप 2014 से ब्लॉग लिख रही है। उनके ब्लॉग पर विभिन्न विषयों से संबधित रोचक जानकारियां और सामाजिक व घरेलू टिप्स आदि ढ़ेरो जानकारीवर्द्धक लेखो की काफी लम्बी श्रृखला है। ज्योति जी से ई-मेल jyotidehliwal708@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है और उन्हे Facebook पर फालो कर सकते है।


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