30 April, 2017

चंद ख़्याल मेरे | ब्लॉग एकलव्य

अब आ रहा है चैन 
क्यूँ जागूँ ? तूँ बता 
कल ही अभी सोया हूँ 
ख़लल डालूँ,तूँ बता!

बेच ही रहें हैं 
तो बेचने दे!
आख़िर कफ़न उनका है 
मैयत भी उनकी!

वो नाचतें हैं,सिर पे!
जाग जाऊँगा 
वो खाते हैं, ज़िस्म को!
ख़ौफ खाऊँगा 
मसलन इंसान ही हूँ !
ख़ाक में मिल ही जाऊँगा 

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए 'एकलव्य' ब्लॉग पर जाएं >>>



ध्रुव सिंह जी एक नये ब्लॉगर व लेखक है। वर्तमान में एकलव्य ब्लॉग का संचालन कर रहे है और कविता के माध्यम से अपनी भावनाओं को प्रस्तुत करते है। ब्लॉगर से dhruvsinghvns@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है।


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