01 April, 2017

सिर्फ़ कानुन से नहीं, इन तरीकों से लग सकती है शादी की फ़िजुलखर्ची पर रोक | आपकी सहेली


शादी...हर इंसान का सुनहरा ख़्वाब! हर इंसान चाहता है कि उसकी या उसके बच्चों की शादी बड़ी धूमधाम से हो...इतनी धूमधाम से कि लोग सालों तक याद रखें! अरे, शादी तो फ़लाने के यहां की थी...क्या निमंत्रण पत्रिका छपवाई थी...क्या डेकोरेशन था...मेहमानों को रुकने के लिए बहुत ही बड़ी होटल बुक की थी...बाजेवाले पंजाब से आएं थे...कैटरर्स दिल्ली के थे... मिठाई तो इतने तरह की थी कि बस पूछो ही मत...मानना पड़ेगा दिल खोल कर ख़र्चा किया शादी में...भई, शादी हो तो ऐसी...वा...ऊ...मजा आ गया था!!!
यह सब बातें हम रोज़मर्रा के जीवन में आए दिन सुनते रहते है। यह सुन-सुन कर हर किसी की स्वाभाविक इच्छा होती है कि उसकी या उसके बच्चों की शादी वह बड़ी धूमधाम से करें। लेकिन हम भारतीयों के इस सपने पर सरकार डंड़ा चलाने की सोच रही हैं। अभी तो हम नोट बंदी की कड़वी दवाई भी ठीक से गीटक नहीं पाए कि एक और कड़वी दवाई पिलाने की तैयारी हो रही हैं।

क्या है शादी की फ़िज़ूलखर्ची का बिल

बिहार के बाहुबली नेता पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन ने लोकसभा में यह बिल पेश किया है। इस बिल में शादियों में होनेवाली फ़िज़ूलखर्ची पर नकेल कसने की बात की गई है। बिल के मुताबिक 5 लाख से ज्यादा खर्च करने पर उसका 10% ग़रीबों को दान करना होगा। इतना ही नहीं, शादी में कितने मेहमान बुला सकते है एवं खाने के मेन्यु में कितने व्यंजन होंगे ये भी इस बिल में होगा। जम्मू-कश्मीर की सरकार ने तो इस कानून को लागू भी कर दिया है। जिसके मुताबिक लड़के की शादी में 400 मेहमान और लड़की की शादी में 500 मेहमानों की संख्या निर्धारित की है। खाने के मेन्यू में 2 स्वीट डिश के साथ 7 शाकाहारी और 7 मांसाहारी व्यंजन ही परोसे जा सकते है।

क्या कानून से शादी की फ़िज़ूलखर्ची पर रोक लग सकती है?

हमारे देश में कानून की हालत यह है कि वहां पर संसद में एक कानून पास भी नहीं होता उसके पहले ही उस कानून से बच निकलने के दस रास्ते हमारे होनहार वकील ढूंढ निकालते है। क्या हमारे यहां कन्या-भ्रूण हत्या, बाल विवाह, दहेज़, भ्रष्टाचार इन पर कानून नहीं बने है? क्या कानून बनने से इन पर रोक लग सकी है? नहीं न? आज किसी भी कानून की असलीयत यह हो गई है कि जितना हम कानून को कठोर बनायेंगे, उतना ही उसे तोड़ने के लिए हम लोगों को प्रोत्साहित करेंगे। लेकिन यह बात सच है की कानून बनने से अपराधो पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकती, पर अपराधों में कमी जरुर आती है। ठीक उसी प्रकार कानून बनने से शादी की फ़िजूलखर्ची पर भी सिर्फ़ कुछ प्रमाण में रोक लग सकती है।

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ज्योति देहलीवाल जी एक गृहणी है और महाराष्ट्र में निवारसरत है। आप 2014 से ब्लॉग लिख रही है। उनके ब्लॉग पर विभिन्न विषयों से संबधित रोचक जानकारियां और सामाजिक व घरेलू टिप्स आदि ढ़ेरो जानकारीवर्द्धक लेखो की काफी लम्बी श्रृखला है। ज्योति जी से ई-मेल jyotidehliwal708@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है और उन्हे Facebook पर फालो कर सकते है।


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