31 July, 2017

एक सफलता ऐसी भी | नई सोच


मिठाई का डिब्बा मेरी तरफ बढाते हुए वह मुस्कुरा कर बोली  "नमस्ते मैडम जी !मुँह मीठा कीजिए" मैं मिठाई उठाते हुए उसकी तरफ देखकर सोचने लगी ये आवाज तो मंदिरा की है परन्तु चेहरा......नहीं नहीं वह तो अपना मुंह दुपट्टे से छिपा कर रखती है ....नहीं पहचाना मैडम जी... मैं मंदिरा .(सुनकर मेरी तो जैसे तन्द्रा ही टूट गयी)... ..मंदिरा तुम ! मैने आश्चर्य से पूछा.... यकीनन मैं उसे नहीं पहचान पायी ,पहचानती भी कैसे....मंदिरा तो अपना चेहरा छिपाकर रखती है ....न रखे तो करे क्या बेचारी,पल्लू सर से हटते ही सारे बच्चे चिल्ला उठते हैं,  भूत.......आण्टी !आपका चेहरा कितना डरावना है !!!

उसका होंठ कटा हुआ था,  जन्म से...इसीलिए तो हमेशा मुँह दुपट्टे से ढ़ककर रखती है वह.....पर आज तो होंठ बिल्कुल ठीक लग रहा था...ना ही उसने मुँह छिपाया था औऱ न ही इसकी जरूरत थी ।

मैने मिठाई उठाते हुए उसके मुँह की तरफ इशारा करते हुए पूछा कैसे ? और सुना है तुमने काम भी छोड़ दिया ..?
वह मुस्कुराते हुए बोली..."अभी आप मुँह मीठा कीजिये मैडम जी !  बताती हूँ ....आप सबको बताने ही तो आयी हूँ ,.मैंं सोची सब बोलते होंगे मंदिरा चुपचाप कहाँ चली गयी ?.....इसलिये ही मैं आई".........

बाद में  उसने हमें बताया कि उसका बेटा army मेंं भर्ती हो गया है..."बड़े होनहार है मेरे दोनो बेटे.... बेटे ने मिलिट्री अस्पताल में मेरे मुँह की सर्जरी करवाई......और मुझे काम छोड़ने को कहा है.........मेरा छोटा बेटा इंजीनियर बनना चाहता है.....बड़े बेटे ने कहा है खर्चे की चिन्ता नहीं करना , बस पढ़ाई कर मन लगाके और बन जा इंजीनियर.... अब हमने झोपड़ पट्टी(जहाँ वो रहते थे) भी छोड़ दी, चौल में किराए का घर लिया है ....वहाँ अच्छा माहौल नहींं था न पढ़ने  के लिए.....ऊपर वाले ने साथ दिया मैडम जी.....बड़ी कृपा रही उसकी".........कहते हुये मंदिरा के चेहरे पर संतोष और गर्व के भाव थे ।

उसे सुनते हुये मुझे ऐसा लग रहा था मानो मै दुनिया की सबसे कामयाब औरत से बात कर रही हूँ.....
उसने बताया कि कैसे उसने अपने बच्चों को पढ़ाया....... कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा उसे जीवन में ...
कटे होठों के कारण उसे क्या क्या सहना पड़ा...... तीन बहनोंं में सबसे छोटी थी मंदिरा.......दो बड़ी बहनों का रिश्ता अच्छे जमीन -जायदाद वाले घर में हुआ, मंदिरा के इस नुक्स के कारण कोई अच्छा खानदानी रिश्ता उसके लिए नहीं आया....... तब बड़ी मुश्किल से इस मेहनत -मजदूरी करने वाले शराबी के हाथ उसे सौंप दिया गया....उसका जीवन बद से बदतर हो गया.....

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सुधा देवरानी जी 2016 से ब्लॉगिग कर रहें है और अपनी कविताओं को नई सोच ब्लॉग के माध्यम से पाठको के बीच रख रहीं है। ब्लॉगर सुधा जी से ई-मेल sdevrani16@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है। 


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