25 July, 2017

आओ जीवन के किरदार में सुन्दर रंग भरे | ब्लॉग ऊंचाईयाँ


तन के पिंजरे में
शिवशक्ति परमात्मा की
दिव्य जोत
आत्मा से ही जीवन का अस्तित्व
आत्मा बिन शरीर बन जाता है शव।।
फिर क्यों न आत्मा को ही शक्तिशाली बनायें
आत्मा को पमात्मा में स्थिर करके जीवन को
सफ़ल बनाएं।
  
जीवन का सत्य,
एक अनसुलझी पहेली
जीवन सत्य है
पर सत्य भी नहीं
पर जीवन क्या है
एक अनसुलझी पहेली।।

जीवन एक सराय
हम मुसाफ़िर माना कि सत्य है
सफ़र....बहुत लम्बा सफ़र ।।
सफ़र का आनन्द लो
खूबसूरत यादों को जीवन के
कैमरे में कैद कर लो अच्छी बात है,
बस यही साथ जाना है।
अच्छी यादें, माना कर्मों की खेती
जैसा बीज, वैसी खेती।

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए 'ऊंचाईयां' ब्लॉग पर जाएं >>>



श्रीमती रितु आसूजा जी सन 2013 से ब्लॉग लिख रहीं है और तब से लेकर अब तक प्रेरक और समाजिक लेखन के जरिए ब्लॉग जगत में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। उनसे ई-मेल ritu.asooja1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। रितु जी काे फेसबुक पर फालों करने के लिए यहां क्लिक करें।


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