06 July, 2017

स्वयं का नेतृत्व | ब्लॉग ऊंचाईयां


कौन कसके हक की बात करता है
अपने कर्मों की खेती स्वयं ही करनी पड़ती है
स्वयम ही स्वयम को प्रोत्साहित करो
काफिले में सर्प्रथम तुम्हे अकेले ही चलना पड़ेगा
जीत तो उसी की होती है ,जो स्वयम ही स्वयम का
नेतृत्व करता है।

मैंने उस वक्त चलना शुरू किया था
जब सब दरवाजे बंद थे,
पर मैं हारमानने वालों में से कहाँ था
कई आये चले गए ,सब दरवाजे बंद है
कहकर मुझे भी लौट जाने की सलाह दी गयी। पर,

मैं था जिद्दी ,सोचा यहां से वापिस नहीं लौटूंगा
टकटकी लगाये दिन-रात दरवाजा खुलने के इन्तजार
मैं पलके झपकाए बिना बैठा रहता,
बहुतों से सुना था दरवाजा सालों से नही खुला
पर मेरी जिद्द भी बहुत जिद्दी थी।

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए 'ऊंचाईयां' ब्लॉग पर जाएं >>>



श्रीमती रितु आसूजा जी सन 2013 से ब्लॉग लिख रहीं है और तब से लेकर अब तक प्रेरक और समाजिक लेखन के जरिए ब्लॉग जगत में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। उनसे ई-मेल ritu.asooja1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। रितु जी काे फेसबुक पर फालों करने के लिए यहां क्लिक करें।


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