22 August, 2017

धरती माँ की चेतावनी | ब्लॉग नई सोच


मानव तू संतान मेरी  
मेरी ममता का उपहास न कर।
सृष्टि-मोह वश मैंं चुप सहती,
अबला समझ अट्टहास न कर।
  
सृष्टि की श्रेष्ठ रचना तू!
तुझ पर मैने नाज़ किया।
कल्पवृक्ष और कामधेनु से,
अनमोल रत्नों का उपहार दिया।

क्षुधा मिटाने अन्न उपजाने,
तूने वक्ष चीर डाला मेरा।
ममतामयी-माँ बनकर मैने,
अन्न दे, साथ दिया तेरा।
  
तरक्की के नाम पर तूने,
खण्ड-खण्ड किया मुझको।
नैसर्गिकी छीन ली मेरी,
फिर भी माफ किया तुझको।

पर्यावरण प्रदूषित करके तू,
ज्ञान बढाये जाता है।

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