22 August, 2017

जन्मदिन | ब्लॉग मेरी आवाज़


जन्मदिन के इस सुअवसर पे तुम्हें अर्पण करूँ क्या
देख लो मेरे हृदय को भावना दर्पण करूँ क्या

पूँछता हूँ मैं अकिंचन आज अपने यार से
बाँट दूँ यह विश्व सारा या समेटूँ प्यार से
शब्द हैं, कुछ अर्थ हैं, कुछ भावनाओं के कुसुम
ला बिछाऊँ आज मैं पैरों तले गुलजार से
बौर की देखो छटा है माह ये ऋतुराज का
दिव्य - मेधा हो प्रभा आलोक हो गणराज का




नीलेन्द्र शुक्ल 'नील' जून 2016 से ही ब्लॉग दुनिया में आए है। ये काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से संस्कृत में स्नातक के छात्र है। आपसे sahityascholar1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।


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