22 August, 2017

मेरी नियति | ब्लॉग ऊंचाईयाँ


ना जाने मेरी नियति
मुझसे क्या-क्या करवाना
चाहती है।

मैं संतुष्ट होता हूँ
तो होने नहीं देती
बेकरारी पैदा करती है,
जाने मुझसे कौन सा अद्भुत
काम करवाना चाहती है।

मैं जानती हूँ, मैं इस लायक नहीं हूँ
फिर भी मेरी आत्मा की बेकरारी,
मुझे चैन से बैठने ही नहीं देती।
समुन्दर में लहरों की तरह छलांगे
लगती रहती है।

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए 'ऊंचाईयां' ब्लॉग पर जाएं >>>



श्रीमती रितु आसूजा जी सन 2013 से ब्लॉग लिख रहीं है और तब से लेकर अब तक प्रेरक और समाजिक लेखन के जरिए ब्लॉग जगत में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। उनसे ई-मेल ritu.asooja1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। रितु जी काे फेसबुक पर फालों करने के लिए यहां क्लिक करें।


यदि आप भी अपनी ब्लॉग पोस्ट को अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचाना चाहते है। तो अपने ब्लॉग की नई पोस्ट की जानकारी या सूचना हमें दें। अपनी ब्लॉग की पोस्ट शेयर करने के लिए अपने ब्लॉग पोस्ट का यूआरएल और अपने बारे में संक्षिप्त जानकारी एवं फोटो सहित हमें - iblogger.in@gmail.com पर ई-मेल करें।

No comments:
Write टिप्पणियाँ


Blog this Week

loading...