12 August, 2017

बच्चें क्यों हो रहे “ब्ल्यू व्हेल'' जैसे सुसाइड गेम के शिकार और इससे बच्चों को कैसे बचाएं?


हर इंसान को जिंदगी में सबसे ज्यादा यदि कोई चीज पसंद हैं, तो वो हैं खुद की जान। जिंदगी की समस्याओं से घबराकर या गंभीर बीमारी से तंग आकर इंसान मुंह से कह तो देता हैं कि ऐसी जिंदगी से तो मौत अच्छी! लेकिन जब असल में मौत सामने आती हैं तो हर इंसान जिंदगी चाहता हैं...थोड़ा सा और जीना चाहता हैं! फ़िर ये आजकल के बच्चों को क्या हो गया हैं जो 'ब्ल्यू व्हेल' जैसे सुसाइड गेम खेल कर अपनी जान देना चाहते हैं? आत्महत्या करना चाहते हैं?

क्या हैं “ब्ल्यू व्हेल गेम”?

सही मायने में यह एक गेम न होकर दो व्यक्ति के बीच का एक प्रकार का चुनौतिपूर्ण सौदा हैं। इसलिए इसे ‘’Blue Whale challenge’’ भी कहा जाता हैं। यह गेम खेलना शुरू करने से पहले प्रशासक को एक निवेदन भेजना पड़ता हैं जिसमें “मैं जिंदगी से तंग आ चुका हूं और मुझे अपना जीवन खत्म करने की इच्छा हैं” ऐसा संदेश लिखा होता हैं। इस गेम को रुस के फिलीप बुदेकिन नाम के 22 साल के लड़के ने बनाया हैं। हालांकि अब उसे रुस के युवाओं को मौत के लिए प्रेरित करने के लिए जेल हो चुकी हैं। मोबाइल, लैपटॉप और डेस्कटॉप पर खेले जाने वाले इस गेम में विभिन्न चुनौतिपूर्ण कार्यों को 50 दिनों में पूरा करना होता हैं। रेजर से हाथ काट “f57’’ बना कर प्रशासक को फोटो भेजना, सुबह 4.30 बजे उठकर प्रशासक की भेजी हुई डरावनी वीडिओ देखना, सबसे उपर की मंज़िल पर जाकर किनारे पर खड़े होना और सुई को अपने हाथ पर बार-बार चुभोना आदि जानलेवा कार्यों से ही इस गेम की शुरवात होती हैं। हर एक कार्य के बाद हाथ पर चाकू से एक निशान बना कर उसकी फोटो प्रशासक को भेजनी पड़ती हैं। अंतिम दिन हाथ पर चाकू से जो निशान बनाए जाते हैं उनसे व्हेल की आकृती बनती हैं इसलिए इसे 'ब्ल्यू व्हेल गेम' कहा गया हैं। अंतिम चुनौतिपूर्ण कार्य ‘आत्महत्या’ ही होता हैं।

क्यों आया चर्चा में “ब्ल्यू व्हेल गेम”

पूरी दुनिया में अब तक 200 से ज्यादा बच्चों ने यह गेम खेलकर आत्महत्या कर ली हैं। भारत में जब 30 जुलै को मुंबई के अंधेरी ईस्ट की शेर-ए-पंजाब कालोनी में 14 साल के मनप्रीत सिंह साहनी ने 5 मंजिले इमारत से कुदकर जान दी तब यह चर्चा में आया। देश की संसद में इस पर बैन लगाने की मांग की गई और मुंबई में इसके खिलाफ बच्चे सड़क पर उतर आए।

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