15 August, 2017

सियासत और दूरदर्शिता | ब्लॉग नई सोच


प्रभु श्री राम के रीछ-वानर हों या,
श्री कृष्ण जी के ग्वाल-बाल...

महात्मा बुद्ध के परिव्राजक हों या,
महात्मा गाँधी जी के  सत्याग्रही...

दूरदर्शी थे समय के पारखी थे,
समय की गरिमा को पहचाने थे...

अपनी भूमिका को निखारकर
जीवन अपना संवारे थे...

आजकल भी कुछ नेता बड़े दूरदर्शी हो गये,
देखो! कैसे दल-बदल मोदी -लहर में बह गये...

इसी को कहते हैं चलती का नाम गाड़ी,
गर चल दिया तो हुआ सयाना...
छूट गया तो हुआ अनाड़ी...

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