12 August, 2017

रक्षा का वादा | ब्लॉग बोल सखी रे


राखियों से सजी हुई कलाइयां
देती हैं अपनी बहनों को सुरक्षा का वादा
हर बहन अपने भाई की कलाई पर रेशम की गाँठ बाँध कर
सहेज लेती है रिश्ता उम्र भर के लिए,
भाई भी बहनों को देते हैं उम्मीद
कि उम्र भर निभाएंगे साथ
हर मुश्किल में होंगे उनके आस-पास।

पर कितने भाई निभा पाते हैं अपना वादा?
जब बहन ससुराल में बात बात पर झेल रही होती है शब्द बाण,
इच्छा के विरुद्ध खपा देती है अपना सर्वस्व पति के चरणों में,
अपने आत्मसम्मान के लिए सिर उठाने की हिम्मत नहीं कर पाती
अपनी छोटी-छोटी खुशियों के लिए भी करती है ज़द्दोज़हद
तब कहाँ होता है भाई का रक्षा का वादा। 

<<< पूरी कहानी पढ़ने के लिए 'बोल सखी रे' ब्लॉग पर जाएं >>>



अपर्णा बाजपेयी जी सन 2016 से ब्लॉग लिख रहीं है। अपर्णा जी अपने ब्लॉग पर कविताएं और कहानियां व प्रेरक कोट्स लिखती है। अधिक जानकारी के लिए उनके ब्लॉग को विजिट करें। 


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