25 August, 2017

गुरु | ब्लॉग हिन्दी-आभा*भारत


डॉक्टर को
उसके गुरु
सिखाया करते  थे-
"मौत से घृणा करो"
वे आज
विश्वास के क़ातिल /
मौत के
सौदाग़र हो गए
पैसे के भारी
तलबग़ार हो गए।

नेता को
उसके गुरु
सिखाया करते थे-
"राजनीति का ध्येय
समाज-कल्याण है
उसूलों पर खरे उतरना"
वे आज
लाशों पर
रोटियां सेकने में
माहिर हो गए
भ्रष्टाचारी / अवसरवादी दुनिया के
मुसाफ़िर हो  गए।

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए 'हिन्दी-आभा*भारत' ब्लॉग पर जाएं >>>



रविन्द्र सिंह यादव जी का परिचय उन्ही के शब्दों में : कविता, कहानी और लेख लिखते-लिखते समझ विकसित हुई तो पाया जीवनचर्या के लिए केवल लेखन कार्य पर निर्भर रहना नादानी है। वर्तमान में मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट के तौर पर नई दिल्ली में निजी संस्थान में कार्यरत। इटावा उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचल (महाराजपुरा, तहसील चकरनगर) में 14 जनवरी 1968 जन्म। म. प्र. के कई ज़िलों में रहकर शिक्षा प्राप्ति। आकाशवाणी ग्वालियर म.प्र. से 1992-2003 के बीच कविता, कहानी, वार्ता, विशेष कार्यक्रम आदि का नियमित प्रसारण। ग्वालियर से प्रकाशित होने वाले विभिन्न दैनिक समाचार-पत्रों में लेख व कविताओं का प्रकाशन।


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