14 September, 2017

ईश्वर प्रद्युम्न के माता-पिता को दु:ख सहने की शक्ति दे | ब्लॉग आपकी सहेली


आज टीवी चैनल पर, अखबारों में और सोशल मीडिया पर सभी तरफ़ प्रद्युम्न के साथ हुई दिल दहलाने वाली घटना छाई हुई हैं। जब-जब टीवी पर मासूम प्रद्युम्न का चेहरा दिखता हैं रुह कांप जाती हैं मेरी! कितना प्यारा और कितना मासूम दिख रहा हैं प्रद्युम्न! कितना निर्दयी राक्षस होगा उसका हत्यारा! क्या उसका दिल थोड़ा सा भी नहीं पसीजा होगा इतने मासूम बच्चे का कत्ल करते वक्त! कहां से लाया होगा उस हत्यारे ने इतना कठोर हृदय? क्या बीत रही होगी प्रद्युम्न के माता-पिता पर? सोच कर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उन्हें सांत्वना देने के लिए किसी के भी पास शब्द नहीं हैं। उनके दु:खी हृदय के नीरव क्रंदन से पूरे देशवासियों के अंतरात्मा की श्रवणेन्द्रिया लहुलुहान हो गई हैं। उन्हें क्या पता था कि जिस बच्चे को वे स्कूल में अच्छा-भला तंदुरुस्त छोड़ आए हैं सिर्फ़ आधे घंटे बाद उस बच्चे की खून से लथपथ लाश देखने को मिलेगी! सचमुच, हम सब उनके दु:ख की सिर्फ़ कल्पना भी नहीं कर सकते!
कितना दर्द सहती हैं एक माँ...बच्चे को गर्भ में पालते वक्त...फ़िर बच्चे को जन्म देते समय...और बच्चे के जन्म के बाद तो माता-पिता की पूरी दुनिया ही बच्चे के इर्द-गिर्द सिमट जाती हैं। बच्चे के हंसने से माता-पिता हंसते हैं और बच्चे को जरा सी चोट आने से वे खुद दर्द से तड़प जाते हैं। किसी भी चोट से जितना दर्द बच्चे को स्वयं को नहीं होता होगा उतना दर्द माता-पिता को होता हैं। जब बच्चा थोड़ा सा बड़ा होता हैं तब बच्चे को स्कूल भेजते वक्त खासकर माँ को बहुत तकलीफ़ होती हैं। क्योंकि अभी तक जागते-सोते, खाते-पीते, सुबह-शाम और रात-दिन बच्चा माँ के इर्द-गिर्द ही घुमता रहता हैं। बच्चा पूरी तरह अपनी माँ पर ही निर्भर रहने से बच्चे को स्कूल भेजते वक्त माँ को एक अनजाना भय सताते रहता हैं की अब उसका बच्चा उसके बिना स्कूल में कैसे रहेगा...बच्चा स्कूल में रोएगा तो नहीं...उसे भूख तो नहीं लगी होगी...स्कूल के अन्य लड़के और लड़कियां उसे तंग तो नहीं करेंगे...इन्हीं सब भयों के साथ हर माँ अपने दिल पर पत्थर रख कर अपने कलेजे के टुकड़े को स्कूल भेजती हैं।

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ज्योति देहलीवाल जी एक गृहणी है और महाराष्ट्र में निवारसरत है। आप 2014 से ब्लॉग लिख रही है। उनके ब्लॉग पर विभिन्न विषयों से संबधित रोचक जानकारियां और सामाजिक व घरेलू टिप्स आदि ढ़ेरो जानकारीवर्द्धक लेखो की काफी लम्बी श्रृखला है। ज्योति जी से ई-मेल jyotidehliwal708@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है और उन्हे Facebook पर फालो कर सकते है।


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