19 September, 2017

आवाज़ कौन उठाएगा? | ब्लॉग बोल सखी रे


मेरे शब्दों का रंग लाल है 
रक्तिम लाल!
जैसे झूठी मुठभेड़ में मरे 
निर्दोष आदमी का रक्त...
जैसे रेड लाइट एरिया में पनाह ली हुई... 
औरत के सिन्दूर का रंग.
जैसे टी बी के मरीज का खून...
जो उलट देता है अपनी गरीबी...
हर खांसी के साथ.

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अपर्णा बजपेयी जी जम्शेद्पुर में रहती है। आपने 2016 में ही ब्लॉग लेखन शुरू किया है और वर्तमान में झारखंड में आदिवासियों के बीच स्वास्थ, शिक्षा, आजीविका के मुद्दे पर काम कर रहीं है। दैनिक हिन्दुस्तान, जन संदेश टाइम्स, कथाक्रम तथा अन्य कई पत्र पत्रिकाओं में आपकी कविता और कहानियां प्रकाशित हो चुकी हैं।


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