22 September, 2017

चुप सो जा....मेरे मन ....चुप सो जा....!!! | ब्लॉग नई सोच


रात छाई है घनी ......
पर कल सुबह होनी नयी,
कर बन्द आँखें, सब्र रख तू;
मत रो, मुझे न यूँ सता.......
चुप सो जा........मेरे मन.......चुप सो जा.....!!!
तब तक तू चुप सोया रह!
जब तक न हो जाये सुबह;
नींद में सपनों की दुनिया तू सजा.........
चुप सो जा.........मेरे मन......चुप सो जा.......!!!
सोना जरुरी है, नयी शुरुआत करनी है ,
भूलकर सारी मुसीबत, आस भरनी है ;
जिन्दगी के खेल फिर-फिर खेलने तू जा.....
चुप सो जा......मेरे मन........चुप सो जा............!!!
सोकर जगेगा, तब नया सा प्राण पायेगा ,
जो खो दियाअब तक, उसे भी भूल जायेगा;

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ब्लॉग 'नई सोच' पर विजिट करें >>>


सुधा देवरानी जी 2016 से ब्लॉगिग कर रहें है और अपनी कविताओं को नई सोच ब्लॉग के माध्यम से पाठको के बीच रख रहीं है। ब्लॉगर सुधा जी से ई-मेल sdevrani16@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है। 


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