12 September, 2017

माँ क्या कोई अभागी कभी डोली नही चढ़ती ? | ब्लॉग @अभि


जब भी देखती हूँ अपने सूने पाँवों को 
टीस सी उठती है मन में 
मुझे भी अपने पाँवों में 
महावर लगानी है,
सुननी है वो छम-छम 
जो मेरे पाँव की पायलों से हो,
भले ही इन कलाईयों को 
खानदानी कंगन न मिले 
पर उस घर के बुजुर्गों का 
आशीष तो मिले 
जिस घर मेरी डोली जाएगी,
मेरा ब्याह कही दूर देश कर दे 
मैं आते-जाते तुझसे मिलती रहूंगी,
माँ, मेरे लिए दूल्हा मत ढूँढना 
जो सेहरे के पीछे छुपा 
महज एक चेहरा हो,
मुझे तो जीवनसाथी चाहिए,
मेरा मन, मेरी देह 
मेरा सर्वस्व उसका,
वो भी मुझे घर की लक्ष्मी माने,
उसकी राह तकूँगी

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए '@अभि' ब्लॉग पर जाएं >>>



लखनऊ निवासी अभि अभिलाषा जी ने सन 2017 से ही ब्लॉग लिखना शुरू किया है और तब से लेकर अब तक 100 से ऊपर रचनाएं लिख चुकीं है। उनसे ई-मेल abhi.abhilasha86@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। 


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