19 September, 2017

कबीर के 15 दोहे जो हमें जीने का तरीका सिखाते हैं | ब्लॉग ज्ञान वर्षा


महात्मा कबीर एक ऐसी शख्शियत (personality) थे जो जात पात, ऊँच-नीच, छोटा बड़ा, अमीर गरीब जैसी चीजों से, समाज में व्याप्त कुरीतियों (curiosities) से, सामाजिक विसंगतियों (anomalies) से बहुत दूर थे। वह ना तो हिन्दू थे और न ही मुसलमान। वो राम की भक्ति भी करते थे और रहीम की भी। कबीर ने आज से लगभग 600 साल पहले ही सामाजिक विसंगतियों, कुरीतियों, धर्म के नाम पर होने वाली लडाई, हिन्दुओं के कर्मकांडों, पाखंडों, मुसलमानों की धर्मान्धता पर अपने विचारों के जरिये कुठराघात किया था।
कबीरदास ने अपने विचारों को, अपने चिंतन को, अपने उपदेशों को दोहों के रूप में प्रस्तुत किया था। 600 साल बाद आज भी उनके द्वारा कही गयी बातें, उनके विचार , उनके दोहे उतने ही प्रभावशाली है, उतने ही सच्चे हैं, उतने ही ज्ञानवर्धक है, और उतने ही ज़रूरी हैं जितने तब थे। उन्होंने अपने दोहों के जरिये समाज को एक ऐसा आइना दिखाया है, एक ऐसा सन्देश दिया है जिससे लोग अपने मन के अंधकार को दूर करके, अपने आप को एक सच्चा, निर्मल, निश्छल और एक बेहतर इन्सान बना सकते हैं।
उनके दोहों को पढ़कर, उनके विचारों को पढ़कर मन का अंधकार ख़त्म होता है, जीने की नयी राह मिलती है, हर मुश्किल आसान लगने लगती है, मन मिर्मल हो जाता है।

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पुष्पेन्द्र कुमार सिंह जी ग्रेटर नोएडा से है और लगभग दो वर्षो से ब्लॉग दुनिया में सक्रिय है। जो ज्ञान वर्षा ब्लॉग का संचालन कर रहे है। ज्ञान वर्षा ब्लॉग पर आप बेहतरीन माेटिवेशनल लेख पढ़ सकते है। ब्लॉगर से ई-मेल gyanversha1@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है और उन्हे Facebook पर फालो कर सकते है।


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