06 September, 2017

जीवन मे शिक्षक का महत्व | शर्मा 256 ब्लॉग


(गुरुजनो को समर्पित)
गुरु ब्रम्हा गुरु विष्णू
गुरुः देवो महेश्वरा
गुरु शाक्षात परब्रम्हा
तस्मै श्री गुरुवे नमः
हमारे जीवन का प्रारंभ ही शिक्षा के माध्यम से होता है।बालक की प्रथम शिक्षा माता द्वारा प्रारंभ की जाती है,बालक की प्रथम शिक्षक बालक की माता होती है।शिक्षक उस कुम्हार के समान होता है जो कच्ची मिट्टी को पूर्णरूपेण घड़े का आकार देता है।जिस प्रकार कुम्हार कच्ची मिट्टी को खोदकर उसे गला कर व उसे चाक की सहायता से घड़े का रूप देता है तथा अंत में उसे आग पर तिपा (गर्म) कर सख्त रूप दे देता है।वह घड़ी गर्मी में अपने ठंडे शीतल जल के माध्यम से लोगों की प्यास बुझाता है।उसी प्रकार बालक जब बालक बड़ा हो जाता है वह विद्यालय में प्रारंभिक शिक्षा के लिए प्रवेश करता है तब शिक्षक उस बालक को कच्ची मिट्टी से उस दीपक के रूप में परिवर्तित कर देता है जो स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाशित करता है। 
हमारे देश के प्रथम उपराष्ट्रपति तथा देश के द्वितीय राष्ट्रपति महान शिक्षाविद डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को हुआ था।इन्हीं के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में इस दिन को शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाता है बच्चों को डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी से बहुत प्यार था,उन्हीं के आग्रह पर इस विशेष दिन को शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाने लगा।



मध्य प्रदेश के शिवम शर्मा एक विद्यार्थी है और उन्हाेने जून 2017 से ब्लॉग लिखना शुरू किया है। ब्लॉगर से ई-मेल shivam256sharma@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है। 


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