26 September, 2017

महिला उत्पीड़न के विषय पर एक खरी खरी कविता | ब्लॉग उड़ती बात


चरित्र और मर्यादा!
जिसने भी गढ़े होंगे ये शब्द,
बड़ा व्यापक हेतु रहा होगा।
शायद आचार का निर्धारण
और निष्ठा का पालन कहा होगा।
प्रतिपादित किये गये होंगे
सम्भवतः ‘सर्व गुण संपन्न’
मदांध-नियंताओं और
सामंतो के लिये।
किन्तु थोप दिये गये,
पुरुषों के पैरोकारों द्वारा,
कुशलतापूर्वक स्त्रियों पर।
समर्थन मिलना ही था, मिला
और समय के साथ बन गया
यह एक अपरिहार्य संस्कार,
नाम दे दिया गया संस्कृति का
परिप्रेक्ष्य विलुप्त है, क्यों भला ?
प्रश्न तो है, पर अनुत्तरित,
सदा की तरहा।

विषय संवेदनशील है
और इतिहास भी,
सिहरन उठती है
यदि पलट लें कभी
पन्ने उन किताबों के
जिनमें भरे पड़े हैं
किस्से अतिवाद के
उत्पीड़न के, विलासता के।

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अमित जैन 'मौलिक' लेखक, कवि एवं एंकर है। आप मूलतः रेस्तरा व्यवसाय में है और जबलपुर, मध्यप्रदेश के निवासी है। लेखक ज़्यादातर रोमांटिक शायरी, ग़ज़ल, गीत, कवितायें लिखते है, इसके साथ ही भाषण, मंच संचालन सामग्री, कहानियाँ एवं नुक्कड़ नाटक आदि भी लिखते है।


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