28 September, 2017

मोहब्बत के जुदा-जुदा रंगों की 3 रूमानी कवितायें | ब्लॉग उड़ती बात

कविता-बदल गये हो

डबडबाती कोरों 
से भी देखा,
दिखते तो हो तुम!
पर वैसे नही 
जैसे दिखते थे
संभवतः तुम 
बदल गये हो
हाँ!! तुम 
बदल गये हो।

पहले तुम्हें आती थी 
संकेतों की भाषा
झूठ सच क्षोभ विषाद 
सब पकड़ लेते थे।
मैं लिख देती थी 
उंगली से कुछ 
शून्य में, और तुम 
दूर से ही पढ़ लेते थे।
देख भी नही पाती थी 
कोई स्वप्न
और तुम हो कि 
उसे गढ़ देते थे। 
अब तुम थोड़ा 
आंगें निकल गये हो
संभवतः तुम 
बदल गये हो
हाँ!! तुम 
बदल गये हो।

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अमित जैन 'मौलिक' लेखक, कवि एवं एंकर है। आप मूलतः रेस्तरा व्यवसाय में है और जबलपुर, मध्यप्रदेश के निवासी है। लेखक ज़्यादातर रोमांटिक शायरी, ग़ज़ल, गीत, कवितायें लिखते है, इसके साथ ही भाषण, मंच संचालन सामग्री, कहानियाँ एवं नुक्कड़ नाटक आदि भी लिखते है।


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