09 October, 2017

चाँद का दीदार | ब्लॉग ऊंचाईयाँ


करने को चाँद का दीदार
 मैंने आकाश की और निगाहें
जो डालीं,  निगाहें वहीं थम गयीं

आकाश में तो झिलमिलाते तारों की
बारात थी ,सितारों* का सुंदर संसार
असँख्य सितारे झिलमिला रहे थे।
मानों कोई जशन हो रहा हो....
झिलमिलाते सितारों के बीच
चाँदनी बिखेरते चाँद की चमकीली
किरणें सलौनी और सुहानी।

दिव्य, अलौकिक किसी दूजे जहाँ
की परिकल्पना लिये, मैं कुछ पल को
वहीं खो गया।

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श्रीमती रितु आसूजा जी सन 2013 से ब्लॉग लिख रहीं है और तब से लेकर अब तक प्रेरक और समाजिक लेखन के जरिए ब्लॉग जगत में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। उनसे ई-मेल ritu.asooja1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। रितु जी काे फेसबुक पर फालों करने के लिए यहां क्लिक करें।


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