28 October, 2017

ख़ुद के सपनों में ही खुद को देख तू ( गज़ल ) | मेरी आवाज


ये जमीं और आसमाँ कर एक तू
यूँ न हिम्मत हार लड़कर देख तू

तोड़ दे चट्टान भी आये अगर
इस समर में एक भाला फेंक तू

वो तेरे पैरों तले आ जाएँगें
इक कदम आगे निकल कर देख तू

जीत लोगे सब  तुम्हारा है ज़रा 
ज़िन्दगी से डर हटाकर देख तू

क्या रखा है उस बड़े प्रासाद में
आत्मा में झाँक यारा देख तू



नीलेन्द्र शुक्ल 'नील' जून 2016 से ब्लॉग दुनिया में आए है। ये काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से संस्कृत में स्नातक के छात्र है। आपसे sahityascholar1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।


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