01 October, 2017

कलयुग का रावण | ब्लॉग शर्मा 256


त्रेतायुग मे प्रभु श्री राम ने लंका के राजा रावण का वध कर अंत मे बुराई पर अच्छाई की जीत दिलायी तथा यह सिद्ध किया की बुराई चाहे कितनी भी बड़ी हो वह अच्छाई से कभी जीत नहीं सकती।
परंतु वर्तमान कलयुग का रावण त्रेतायुग के रावण से अधिक शक्तिशाली है। कहने को तो हम हर वर्ष विजयदशमी पर रावण के पुतले का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाते है। परंतु सच्चाई यह है कि हम बुराई का अंत सिर्फ पुतले के रूप में ही करते हैं यथार्थ रूप से वह बुराई रुपी रावण हमारे मन, हमारे हृदय में बस चुका है। हममें से कोई भी कलयुग के रावण को नहीं देख सकता और ना हीं देखना चाहता है, कलयुग में ना जाने कितनी सीताये राम के अभाव के कारण रावणों के अत्याचारों के दंश झेल चुकी है तथा झेल रही है। हममें से किसी को भी रावण के पुतले का दहन करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि ना हममें से कोई इस कलयुग में राम है और ना ही कोई श्री राम के बताएं मार्गो व उनके आदर्शों का पालन कर रहा है।
सबसे पहले अपने मन में छुपे उस पाप रूपी रावण का दहन करें जो आपको कलयुग में राम के आदर्शों का पालन करने से रोक रहा है, फिर जाकर आपको विजयदशमी मनाने तथा रावण के पुतले का दहन करने का अधिकार है।
सर्वप्रथम अपने अंदर छुपे उस रावण का दहन कीजिए जो आपको भ्रष्टाचार के लिए प्रेरित करता है, उस रावण का दहन कीजिए जो आपको नारी का सम्मान करने से रोकता है, उस रावण का दहन कीजिए जो आपको देश को दूषित, गंदा करने के लिए प्रेरित करता है, उस रावण का दहन कीजिए जो आपको माता-पिता, बुजुर्गों के सम्मान से रोकता है। उस रावण का दहन कीजिए जो आपको दीन-हीन की सेवा करने से रोकता है, उस रावण का दहन कीजिए जो स्थाई रूप से आपकी मानसिकता में बस चुका है।




मध्य प्रदेश के शिवम शर्मा एक विद्यार्थी है और उन्हाेने जून 2017 से ब्लॉग लिखना शुरू किया है। ब्लॉगर से ई-मेल shivam256sharma@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है। 


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