13 October, 2017

ख़ाकी | ब्लॉग हिन्दी-आभा*भारत


समाज को सुरक्षा का एहसास, 
क़ानून की अनुपालना के लिए  
मुकम्मल मुस्तैद मॉनीटर, 
मज़लूमों की इंसाफ़ की गुहार ,
हों ग़िरफ़्त में मुज़रिम-गुनाहगार ,
हादसों में हाज़िर सरकार , 
ख़ाकी को दिया ,
सम्मान और प्यार ,
अफ़सोस कि इस रंग पर ,
रिश्वत, क्रूरता, बर्बरता, अमानवीयता, ग़ैर-बाज़िब हिंसा ,
विवेकाधिकार का दंभ, भेदभाव का चश्मा, काला पैसा ,
सत्ता के आगे आत्मसमर्पण ,
पूँजी की चौखट पर तर्पण,
ग़रीब फ़रियादी को दुत्कार

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए 'हिन्दी-आभा*भारत' ब्लॉग पर जाएं >>>



रविन्द्र सिंह यादव जी का परिचय उन्ही के शब्दों में : कविता, कहानी और लेख लिखते-लिखते समझ विकसित हुई तो पाया जीवनचर्या के लिए केवल लेखन कार्य पर निर्भर रहना नादानी है। वर्तमान में मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट के तौर पर नई दिल्ली में निजी संस्थान में कार्यरत। इटावा उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचल (महाराजपुरा, तहसील चकरनगर) में 14 जनवरी 1968 जन्म। म. प्र. के कई ज़िलों में रहकर शिक्षा प्राप्ति। आकाशवाणी ग्वालियर म.प्र. से 1992-2003 के बीच कविता, कहानी, वार्ता, विशेष कार्यक्रम आदि का नियमित प्रसारण। ग्वालियर से प्रकाशित होने वाले विभिन्न दैनिक समाचार-पत्रों में लेख व कविताओं का प्रकाशन।


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