19 October, 2017

मन- मंदिर को रौशन बनाएंं | ब्लॉग नई सोच


मन-मंदिर को रौशन बनाएंं
चलो! एक दिया आज मन मेंं जलाएं,
अबकी दिवाली कुछ अलग हम मनाएंं।
चलो! एक दिया आज मन में जलाएं.....

मन का एक कोना निपट है अंधेरा,
जिस कोने को "अज्ञानता" ने घेरा ।
अज्ञानता के तम को दूर अब भगाएं
ज्ञान का एक दीप मन में जलाएं,
मन -मंदिर को रौशन बनाएं।
चलो! एक दिया आज मन में जलाएं......

काम, क्रोध, लोभ, मोह मन को हैं घेरे ,
जग उजियारा है पर, मन हैं अंधेरे ....
रात नजर आती है भरी दोपहरी में,
रौशन दिवाली कब है, मन की अंधेरी मे।

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ब्लॉग 'नई सोच' पर जाएं >>>


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