05 October, 2017

महत्वकांशाएँ | ब्लॉग ऊंचाईयाँ


"महत्वकांशाएँ" आकांक्षाएं तो बहुत होती हैं,
परन्तु जो "महत्व" की "आकांशाएँ" होती हैं
वो "महत्वकांशाएँ "होती हैं ।

मैं जानता हूँ, कि तू बहुत महत्वकांशी
है, ए मानव, तेरी काबलियत पर मुझे
यकीन है
"अभी तो तू कदम,दो क़दम चला है,
मैं नहीं चाहता तेरे क़दम रुक जायें।
तू जीत का जशन मनाना चाहता है,
बहुत प्रसन्न हो रहा है, अभी तो तू एक
पड़ाव पर ही पहुंचा है, मंजिल पर नहीं।

यही तेरी मंजिल है, ऐसा हो नहीं सकता
अभी तो तुझे बहुत ऊंची उड़ाने भरनी हैं"

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए 'ऊंचाईयां' ब्लॉग पर जाएं >>>



श्रीमती रितु आसूजा जी सन 2013 से ब्लॉग लिख रहीं है और तब से लेकर अब तक प्रेरक और समाजिक लेखन के जरिए ब्लॉग जगत में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। उनसे ई-मेल ritu.asooja1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। रितु जी काे फेसबुक पर फालों करने के लिए यहां क्लिक करें।


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