17 October, 2017

याद हैं | ब्लॉग मेरी आवाज


हौले - हौले इश्क़ में वो दिल लगाना याद है
याद है हमको अभी भी वो ज़माना  याद है

रात में तनहाइयाँ आकर सताती हैं मगर
देखना मुझको तेरा वो मुस्कुराना याद है

याद हैं मुझको अभी अँगड़ाइयाँ  भरना तेरा
हाँथ से आँखों पे वो पर्दा लगाना याद है

एक आहट जो तेरी आती है मुझको हर जगह
वो तेरा पीछे से आ मुझको सताना याद है

शाम होते ही तेरी आँखों की वो नजरें - बयाँ
और बागों में तेरा मिलना - मिलाना याद है




नीलेन्द्र शुक्ल 'नील' जून 2016 से ही ब्लॉग दुनिया में आए है। ये काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से संस्कृत में स्नातक के छात्र है। आपसे sahityascholar1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।


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