15 November, 2017

अवशेष | ब्लॉग एकलव्य


सम्भालो नित् नये आवेग 
रखकर रक़्त में 'संवेग' 
सम्मुख देखकर 'पर्वत' 
बदल ना ! बाँवरे फ़ितरत 
अभी तो दूर है जाना 
तुझे है लक्ष्य को पाना 
उड़ा दे धूल ओ ! पगले 
क़िस्मत है छिपी तेरी 
गिरा दे ! आँसू की 'गंगा'
धुल दे,पाप तूँ सारे 
मैं तो आऊँगा ! अक़्सर 

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए 'एकलव्य' ब्लॉग पर जाएं >>>



ध्रुव सिंह जी एक नये ब्लॉगर व लेखक है। वर्तमान में एकलव्य ब्लॉग का संचालन कर रहे है और कविता के माध्यम से अपनी भावनाओं को प्रस्तुत करते है। ब्लॉगर से dhruvsinghvns@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है।


यदि आप भी अपनी ब्लॉग पोस्ट को अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचाना चाहते है। तो अपने ब्लॉग की नई पोस्ट की जानकारी या सूचना हमें दें। अपनी ब्लॉग की पोस्ट शेयर करने के लिए अपने ब्लॉग पोस्ट का यूआरएल और अपने बारे में संक्षिप्त जानकारी एवं फोटो सहित हमें - iblogger.in@gmail.com पर ई-मेल करें।

No comments:
Write टिप्पणियाँ


Blog this Week

loading...