03 November, 2017

इकतरफा प्रेम यूँ करना क्या ?....... | ब्लॉग नई सोच


जब जान लिया पहचान लिया,
नहीं वो तेरा यह मान लिया ।
बेरुखी उसकी स्वीकार तुझे,
फिर घुट-घुट जीवन जीना क्या ?
हर पल उसकी ही यादों में,
गमगीन तेरा यूँ रहना क्या ?......
तेरा छुप-छुप आँँसू पीना क्या ?


उसके आते ही तेरी नजर,
बस उसमें थम जाती है ।
धड़कन भी बढ़ जाती है,
आँखों में चमक आ जाती है।
तू साथ चाहता क्यों उसका,
वो तुझसे कोसों दूर खड़ा ?........
जब उसको ये मंजूर नहीं,
इकतरफा प्रेम यूँ करना क्या ?

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ब्लॉग 'नई सोच' पर जाएं >>>


सुधा देवरानी जी 2016 से ब्लॉगिग कर रहें है और अपनी कविताओं को नई सोच ब्लॉग के माध्यम से पाठको के बीच रख रहीं है। ब्लॉगर सुधा जी से ई-मेल sdevrani16@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है। 


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