03 November, 2017

जीवन और प्रलय | ब्लॉग ऊंचाईयाँ


हाँ-हाँ -हाँ मैं नारी ही हूँ
सौंदर्य की प्रतिमूर्ति हूँ ।
मैं नारी ही, माँ, बहन,बेटी भी हूँ ।
सिंह पर सवार हूँ,
सिंह की दहाड़ हूँ
विशलकाय पहाड़ हूँ।
अबला नहीं मैं सबला हूँ
गुलाब हूँ, काँटों के बीच सुरक्षित हूँ
चाँद हूँ, आफ़ताब हूँ,
सूर्य की आग भी हूँ ।
राजे, महाराजे वीर,बलशाली
योद्धाओं की मैं ही जननी हूँ।
मैं नारी, नहीं बेचारी
मुझमें है शक्तित्व

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श्रीमती रितु आसूजा जी सन 2013 से ब्लॉग लिख रहीं है और तब से लेकर अब तक प्रेरक और समाजिक लेखन के जरिए ब्लॉग जगत में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। उनसे ई-मेल ritu.asooja1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। रितु जी काे फेसबुक पर फालों करने के लिए यहां क्लिक करें।


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