17 December, 2017

एक जनाजा निकला है बिन मौसम का | मेरी आवाज 1


किसने लूटा घर मेरा  तनहाई में 
अब किसका है हांथ मेरी रूसवाई में

बरसों पहले जख्म दिया तूने मुझको 
दर्द उठा है आज वही पुरवाई में

मुंसिफ की हर बात मेरी सर आंखों पर 
जाने दो अब क्या रक्खा सुनवाई में

एक जनाजा निकला है बिन मौसम का 
सरहद पर दी जान किसी तरूणाई नें

उसकी बेबस आंखों का पानी देखो 
सारा दोष निकालो मत हरजाई में

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए 'मेरी आवाज' ब्लॉग पर जाएं >>>



आजम गढ़ के रहने वाले राजेश कुमार राय जी 2015 से ब्लॉगिग कर रहें है और शब्दों को कविताओं में पिरोकर पाठकों के लिए पेश कर रहें है।  ब्लॉगर से ई-मेल pratistharai32@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है। 


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