29 December, 2017

जब तक मेरा दर्द बिकता रहा | ब्लॉग मन से


जब तक मेरा दर्द बिकता रहा 
मै अश्कों की स्याही से लिखता रहा 
डर लगता था कहीं बेमोल न हो जाऊँ 
इसलिए यादों की चक्की में पिसता रहा 
जाता रहा दफ़न यादों के बेदर्द शहर में 
जहाँ का हर पल मुझे चुभता रहा 
छिपता रहा खुशियों से
कहीं हस्ती न मिट जाये
दर्द के समंदर में बार बार डूबता रहा 
तन्हाइयों में डूब करमिटाकर खुशियों को 
अपने ही जख्मों को नोचता रहा 

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए 'मन से' ब्लॉग पर जाएं >>>



नीतू ठाकुर जी ने अक्टूबर 2017 में ब्लॉग लेखन शुरू किया है। अब तक आप अन्य समूह ब्लॉगों, चर्चा मंचों एवं वेब पत्रिकाओं में निरंतर सक्रिय रहती है।  


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