21 January, 2018

बवाल मच गया | ब्लॉग नई सोच


सुन सुन कान पक गये,
उसके तो उम्र भर....
इक लब्ज जो कहा तो बवाल मच गया!!!

झुक-झुक के ताकने की
कोशिश सभी किये थे,
घूरती नजरों के बाणों से
तन बिधे थे,
ललचायी थी निगाहें
नजरों से चाटते थे......
घूँघट स्वयं उठाया तो बवाल मच गया!!!


<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ब्लॉग 'नई सोच' पर जाएं >>>


सुधा देवरानी जी 2016 से ब्लॉगिग कर रहें है और अपनी कविताओं को नई सोच ब्लॉग के माध्यम से पाठको के बीच रख रहीं है। ब्लॉगर सुधा जी से ई-मेल sdevrani16@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है। 


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