22 January, 2018

आज भी माँ क़ब्र से लोरी सुनाती है मुझे | ब्लॉग मन से


सो रही है प्यार से मिट्टी की चादर ओढ़कर 
आज भी माँ क़ब्र से लोरी सुनाती है मुझे 

दूर अंबर में  बसेरा है मेरे माँ का मगर 
आज भी वो दिल के कोने में बसाती है मुझे

भूख से बेज़ार होकर जब पुकारा है उसे
भीगी पलकों से निहारे थपथपाती है मुझे 

जब कभी तन्हा हुआ ये दिल ज़माने से खफा 
बन के झोका याद का वो गुदगुदाती है मुझे

जब कभी घायल हुआ और दर्द से चीखा हूँ मै
चूम कर माथे को मरहम वो लगाती है मुझे

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए 'मन से' ब्लॉग पर जाएं >>>



नीतू ठाकुर जी ने अक्टूबर 2017 में ब्लॉग लेखन शुरू किया है। अब तक आप अन्य समूह ब्लॉगों, चर्चा मंचों एवं वेब पत्रिकाओं में निरंतर सक्रिय रहती है।  


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