16 February, 2018

मैं तुम्हें भुलाना चाहूँगा तुम चाहे मुझे भुलाओ ना | ब्लॉग मेरी आवाज


कल साँझ हमारे साथ रही अब छोड़ मुझे इतराओ ना
मैं तुम्हें भुलाना चाहूँगा तुम चाहे मुझे भुलाओ ना ।।

तेरी धड़कन से तेरी यादों से तेरे सपनों से तेरे ख्वाबों से
मुझे दूर तुम्हें कर देना है अपनी सारी मुलाकातों से
गर तुम्हें दूर ही जाना था इक बार बता के जाती तो
तुम कह देती दिल की बातें पर एक बार तुम आती तो

कुछ ख्वाब टूट कर बिखर गये अब सपने मुझे दिखाओ ना

हर बार तुम्हारे रूठने पर हर बार मनाया करता था
हर बार तुम्हें अपनाने को तेरे पास मैं आया करता था
इस बार हुआ है क्या ऐसा क्यों फेर लिए मुँह तुम हमसे
मैं खुशियों में जीने वाला क्यों जोड़ दिया रिस्ता गम से

अब कैसे मैं जी पाऊँगा थोड़ा सा तुम्हीं बताओ ना




नीलेन्द्र शुक्ल 'नील' जून 2016 से ब्लॉग दुनिया में आए है। ये काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से संस्कृत में स्नातक के छात्र है। आपसे sahityascholar1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।


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