07 February, 2018

प्रेम न हाट बिकाय... | ब्लॉग बदलाव


आज पूरी दुनिया में वेलेंटाइन डे का नशा सा छा गया है ये मार्केटिंग का ही जलवा है की बच्चे बूढ़े हर किसी की जुबान पर इसका नाम चढ़ गया है. हर साल सात से चौदह फरवरी तक प्यार के सप्ताह के रूप में मनाया जाने लगा है जिसे आज की पीढ़ी मस्ती का एक मौका समझ बैठे हैं. रोज डे,प्रोपोज डे,प्रोमिस डे, किस डे, हग डे, चोकलेट डे, टेडी डे और वेलेंटाइन डे. यानि की हर दिन का मार्केटिंग फंडा. ये पाश्चात्य संस्कृति की ही देन है जो हमारी संस्कृति और समाज को विकृत करती जा रही है. इसमें कार्ड, गिफ्ट्स कंपनियो के साथ मीडिया की भी बड़ी भूमिका रही है. वेलेंटाइन को मौज मस्ती का दिन समझने वालो को प्रेम की समझ भी नही होती. गिफ्ट देकर आई लव यू कह समझते हैं की इश्क कर लिया. अरे प्रेम कोई बताने की चीज है क्या ये तो बस एहसास है जिसे दिल खुद पढ़ लेता हैं. वेलेंटाइन को बाजार ने एक मौका के रूप में भुनाने का काम किया है. बड़े बड़े आयोजन होने लगे हैं जहाँ धूम धड़ाके और मौज मस्ती, अश्लीलता की हदों को पार करता भोंडा नृत्य के अलावा कुछ नही होता. शराब-शबाब और कबाब के बीच मनने लगा है प्रेमोत्सव का पर्व. 14 फरवरी के दिन को लोग प्यार के इजहार का दिन मानते हैं लोग जो की सेंट वेलेंटाइन का जन्मदिवस है. क्या इजहार-ए-इश्क किसी खास दिन का मोहताज है? यह तो ऐसी चीज है जो न कही जाती है और न सुनी जाती है सिर्फ और सिर्फ दिल से महसूस करने का नाम है इश्क. आज लोगो ने प्रेम का स्वरुप ही बदल दिया है.

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विगत 20 वर्षों से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े पंकज भूषण शर्मा जी 2009 से ब्लॉग जगत से जुड़े हुए है। प्रारम्भिक स्कूली शिक्षा के समय से ही कविता, गज़ल, नाटक कहानी, लेख और निबन्ध लिखते रहे हैं। अब तक विभिन्न विधाओं में सैकड़ों रचनाये देशभर की पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है। सम्प्रति झारखण्ड सरकार में संचार सलाहकार के रूप में कार्यरत और विभागीय पत्रिका "स्वच्छता प्रहरी" का संपादन कर रहे है। इसके अलावा अन्य कई पत्र पत्रिकाओं का संपादन भी कर रहे है। डॉक्यूमेंट्री और लघु फ़िल्मों का निर्माण और स्थानीय फीचर फिल्मों के लिए भी लेखन और जनसम्पर्क कार्यरत। आकाशवाणी रांची के संपादकीय व उद्घोषक पैनल में शामिल। दूरदर्शन और रेडियो माध्यम पर शोध कार्य। काव्य पाठ और मंच संचालन में भी सक्रिय भागीदारी। 11 वें अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन 2003 में "साहित्य सेवी सम्मान" से अलंकृत। स्वच्छता एवं शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक सेवा।


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